( तर्ज़ – चांदी की दीवार ना तोड़ी ) मुझको प्रभुवर शक्ति देना , गुरु महिमा व्याख्यान की | झाँकी एक दिखा सकूँ मैं तुलसी के अवदान की ।| परम्परा के नाम पर सदियों से शोषित थी नारी | अन्धविश्वास अौर रूढ़िवाद में जकड़ी थी वो बेचारी । मुख्य धारा […]
काव्यभाषा
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