आकण्ठ तक डूबा हूँ, प्रेम लौ से मैं जला हूँ, श्वास के आवर्तनों की, धीरता से मैं छला हूँ । अश्रुओं की सिंचना ने, धो दिये कपोल मेरे, आह! तुमसे न सही, पर वेदना से मैं पला हूँ ।। आभास-जग! आभा- सजग है, रात के पहरे उजारे, नि:शब्द हैं, चुप […]
काव्यभाषा
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