डगमग-डगमग करती चली, बरसात में कागज की नाव। बचपन की याद दिलाती ये, बहती हुई कागज की नाव॥ कौन जीतेगा , कौन हारेगा, लगाते नावों पर ऐसे दांव। बहती रहती बिना पतवार, खेल-खेल में दूर करते तनाव॥ मुश्किलों में भी डटे रहना, सिखाती है हमें बहती नाव। जिंदगी का यही […]
फ़ूट डालकर,बाँटा हमको, भारत-पाकिस्तान में। अंग्रेजों ने,टुकड़े कर दिए प्यारे हिन्दुस्तान में॥ मैं हिन्दू,तू मुसलमां, वह सिख,वे ईसाई। जन्म लिया,भारत भूमि में जैसे हो भाई-भाई॥ स्वर्ग-सा सुन्दर,अपना भारत, क्यों बदला श्मशान में? अंग्रेजों ने,टुकड़े कर दिए प्यारे हिन्दुस्तान में॥ समाजसेवा के रूप में, फिर,राजनीति थी आई। क्षुद्र स्वार्थवश,धीरे से फिर […]
