122 122 122 ख़ुदा की यूँ कुदरत लिखेंगे उन्हीं की इबारत लिखेंगे वही दो जहानों का रहबर उन्हीं की इनायत लिखेंगे मुहब्बत के शायर है हम भी क़लम से मुहब्बत लिखेंगे मिटेंगी तुम्हारी यूँ मुश्क़िल ख़ुदा को हक़ीक़त लिखेंगे नज़र चार तुमसे हुई है तुम्हारी शरारत लिखेंगे सभी माँ को […]
