मँझधारों में माँझी अटका, क्या तुम पार लगाओगी। जर्जर नौका गहन समंदर, सच बोलो कब आओगी। भावि समय संजोता माँझी वर्तमान की तज छाँया अपनों की उन्नति हित भूला जो अपनी जर्जर काया क्या खोया, क्या पाया उसने तुम ही तो बतलाओगी। जर्जर ………………. ।। भूल धरातल भौतिक सुविधा भूख […]
