हो रहा अम्बर धरा का अनुपम मिलन है चुप रहो, सांझ सिन्दूरी का स्नेह अभिनन्दन है चुप रहो।। आलिंगन के साज छेड़ प्रीत रागिनी उकेरी, मधुर मधुर हास का सुरीला गायन है चुप रहो। भाव-हविषा में स्पर्श घृत से प्रज्वलित आनन्द, नयनों ही नयनों में हो रहा हवन है चुप […]
