लोग जहर उगलते हैं,रोज चेहरे बदलते हैं, सच के बने सभी किरदार हैं जो, झूठ और फरेब पे सवार होकर चलते हैं, बबन्डर नफरतों का जेहन में बरकरार हैं जिनके, बातें वो सारी प्यार-मोहब्बत की करते हैं, किसी की कामयाबी की खुशी में,शरीक होने वाले लोग, उसकी कामयाबी के चर्चो […]

 हाहाकार मची चहुँ ओर पसरा सन्नाटा है, कश्मीर से दिल्ली तक बारूद का बोल बाला है। भाषा की अभिव्यक्ति मिली, ये टुकड़े भारत के करते हैं। जिस थाली में ये खाते नापाकी उसमे ही छेद करते हैं। बहुत मांग चुके आज़ादी अब इनको सबक सीखाना है, पथ्थर बाजो को उनकी […]

शिव साधना मे जीवन बीताया मौन से अपनी ऊर्जा को बचाया 108 वर्ष इस धरा पर गुजारे महाकाल के भी थे वे प्यारे मुख पर उनके गजब तेज था मौन की शक्ति से ईश्वरीय वेग था संगीत ,गीत ,कला के थे पुजारी आत्मा मे बसे थे सिर्फ भोले भंडारी मुखरित […]

पांडिचेरी  | पांडिचेरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गुरमीत सिंह ने ‘परिवर्तन’, त्रैमासिक ई-पत्रिका के सिनेमा विशेषांक का लोकार्पण किया. विश्वविद्यालय के जे. एन. आडोटोरियम में 14.12.2018 को आयोजित ‘हिंदी माह पुरस्कार वितरण समारोह’ में तक़रीबन 100 अहिन्दी भाषी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया. इस दौरान कुलपति ने हिंदी विभाग के […]

इस आंदोलन को महानगरों से छोटे कस्बों, मीडिया से बिजनेस और राजनीति तक और सार्वजनिक जीवन से घरेलू यौन उत्पीड़न तक फैलना चाहिए. सार्वजनिक जीवन में हमने पहली चीज़ सीखी है कि आरोपों को सुनते वक्त उन्हें काफी ठोंक बजा कर देखा जाए. संगीन आरोप हमारे सार्वजनिक और उससे ज्यादा […]

तेज रेत सी तपती हूँ मै, एक कतरा पानी का जो मिल जाये। ये अगन प्यासे दिल की जो बुझ जाये। हो तुम मेरी जलती हुयी काया के सागर। इस रेत से जलती हुए बदन को दो बूँद पिला जाना। है प्रणय निवेदन की  तुम एक बार तो मिलने आ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।