माया है संसार यहाँ है सत नारी। जन्माती है, पूत निभाती वय सारी। बेटी माता पत्नि बनी वे बहिना भी। रिश्ते प्यारे खूब निभे ये कहना भी। होती है श्रृद्धा मन से ही जन मानो। नारी सृष्टी सार रही है पहचानो। नारी का सम्मान करे जो मन मेरे। हो जाए […]
तब मैं प्रौढ़ शिक्षा की कक्षाएं लिया करती थी.अस्वस्थ होने की वजह से,एक महीने के लिए मैंने एक तीस-पैंतीस वर्षीया अशिक्षित-महिला,’श्यामा’ को खाना बनाने रखा था.एक शाम वह जल्दी ही खाना बनाने आ गई,पूछने पर बड़ा सकुचाते हुए उसने बताया कि,वह तीज-त्योहार, शादी-ब्याह के गीत स्वयं जोड़-जोडकर बनाती और गाती […]
