कहाँ गये सब छोड़ के इसे आज अकेला बंजर है । ना कोई पंछी है साथी ना गगन में घन बरसाती । दुर्बलता से सहता है नित, आज हृदय में थर थर है। अब बसंत की बात कहाँ बाजों से बरबाद जहाँ तितर- भीतर होगये   पंछी देख अजब सा मंज़र […]

पाय  लागु  कहते  हैं,  डांट – बाट सहते हैं दया  से  करोगे    मत  , आप  पछताओगे। शिशु को  सँवारते हैं, बालों को  निहारते हैं नाख पोंछ  दृश्य  देख  , आप  बहजाओगे। आपसे वे लेते सेल्फी,मुँह में लगा के कुल्फी ठण्ड  करवाने  से  ही, आग  भूल  पाओगे। नोट पांच सौ […]

नीर से अमृत को बनने मथन कितना सहा होगा । टक   टकाया   हथौड़े ने, छीर  दी   छैनी   की  धार शिल्प या पनघट की धातु घाव   से    होता   उद्धार टूटती जब ये शिला ने सपन कितना बुना होगा मथन कितना सहा होगा। इस धरा की कोख में सब निक्षिप्त वस्तु […]

सत्य सरल व्रत नहि रहा,पग-पग कंटक राह, इच्छा अरु संकल्प से,पाते निश्चित चाह पाते निश्चित चाह,रखें नित प्रयास ज़ारी, लक्ष्य रखें नित नैन,कल्पना हो नित भारी होता है दुत्कार,पियें जा नित्य गरल धत, अविचल हृदय “विराट”,बनें यह सत्य सरल व्रत॥                     […]

मनमोहन  मौनी  रहे,मोदी  में  प्रतिशोध, प्रथम  देश अरु धर्म  है,करते  वो संबोध करते वो  संबोध,घूस  न  कोई  कमाए, कभी  न  होवे न्यून,विश्व  में पांव जमाए कह ‘विराट’ कविराय,बनें हम शक्तिमान जन, रोजगार हर हाथ,तभी हर्षित होगा मन॥                           […]

विरह हृदय पर नयन पसारो॥ श्यामल अंबर वृंदावन है,आओ कुंज  विहारो। कंचन तन अरु मन मधुवन है,आकर  मोहिं निहारो। सकल जगत निष्प्राण हुआ ज्यों,उर जड़ता को हारो। राधा हूँ,पिय अंतर्मन की,इव दुख बोझ उतारो। मधुर मिलन को मैं हूँ प्यासी,अब तो आप पधारो॥     #श्रीमन्नारायणाचार्य ‘विराट’ Post Views: 330

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।