युगान्तर… सुख और दुख से परे मैं… युगान्तर बना फिरता हूँ वक्त को समझने की विलक्षण प्रतिभा जो है मगर युद्ध अनवरत जारी है कृष्ण जो हूँ… मैं चाहूँ तो कोई युद्ध ना हो गर चाहूँ कोई संजोग ना हो  कोई वियोग ना हो… मगर युद्ध अनवरत ? ? ?  […]

 देखकर तुम्हें बढ़ जाती थी धड़कन गुड़मुड़ भावों का आलोड़न चिहुंक उठती थी उत्कंठाएं। न जिन्हें, कितने लाती थी संदेश! कभी खुलकर तो छुपकर भी कभी खुशी-आवेश में धीमे- से, दुःख मन से भी, हौले से शरमाकर भी, पढ़ी तो पढ़वाई भी,  जाती थी कभी। ऐं चिट्ठियां, तू कितने नगर-ग्राम […]

कुछ गाओ दर्द उन्हीं का,जो घर होकर बेघर रहते हैं, हालात के हाथों हो मजबूर,जो घर होकर बेघर रहते हैंl कुछ होते दूर माँ से अपनी मर्जी से, कुछ को भूख दूर लेकर जाती है कुछ होते हैं दूर पैसों की खनक से, तो कुछ को मजबूरी भी दूर करती […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।