`भारत स्वच्छ अभियान` अभी तक कोई ज्यादा असर नहीं दिखा पाया है,पर आने वाले समय में निश्चित ही ये बहुत सार्थक सिद्ध होगा। दरअसल कोई कार्य मात्र औपचारिकता से सम्पन्न नहीं हो सकटा है। पूरी की पूरी मानसिकता बदलनी है,क्योंकि अज्ञानता, लापरवाही और आदतन ही व्यक्ति स्वच्छता की तरफ ध्यान […]

दीपावली का पर्व ज्यों-ज्यों पास आ रहा था,शोभा के चेहरे की आभा अपनी कांति खोती जा रही थी,जिसे वह चाहकर भी छुपा नहीं पाती थी। उसे यह चिंता सता रही थी कि,अगर दीपावली पूजन पर भी सुमित घर नहीं लौटे तो वह आस-पड़ोस से उठती शंकालु निगाहों को क्या जवाब […]

‘शिवरतन बेटा तुम्हारा साक्षात्कार बुलावा आया है’, मां ने लिफाफा हाथ में देते हुए कहा। यह मेरा सातवां साक्षात्कार था। मैं जल्दी से तैयार होकर दिए गए नियत समय 9 बजे पहुंच गया। एक घर में ही बनाए गए कार्यालय का दरवाजा खुला ही पड़ा था,मैंने बन्द किया और भीतर […]

इसे संयोग ही कहा जाएगा कि,भारत में नवरात्रि का उत्सव और मोहर्रम इन दिनों दोनों एकसाथ आए हैं। नवरात्रि में नौ दिन-रात तक माँ शक्ति दुर्गा की आराधना की जाती है और आव्हान किया जाता है कि,जीवन में शक्तिमत्ता बनी रहे। ऐसे ही मोहर्रम में दस दिन तक मातम मनाते […]

वर्तमान समय में सिर्फ एक ही चीज पर लोग ज्यादा ध्यान केन्द्रित करते हैं और वो है दिखावा। एक मध्यम परिवार का बच्चा अपने माता-पिता से आए दिन नई -नई चीजें हमेशा मांगता रहता है,और पिता अपने पुत्र की हर फरमाईश को अभी तक पूरा करता आ रहे थे। एक […]

हर मनुष्य को स्वदेश और स्वभाषा से प्रेम होना चाहिए। हिंदी की छोटी बहन उर्दू है। यह हमारी बोलचाल की भाषा में अच्छे से घुल मिल गई है। इस भाषा ने पूरे भारतवर्ष को एकता में पिरोया हुआ है। भारत के एक सिरे से दूसरे सिरे तक हिंदी भाषा कुछ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।