दुनिया से डरने वाले,कब प्यार करते हैं, कशमकश में रहने वाले जीते ना मरते हैं। जो लोग सोचते रहते,दो राहे पर खड़े होकर, मंजिलों के सरताज,कभी बना नहीं करते हैं। बढ़ाई थी धड़कनें जिसने तेरे दिल की, वो आज भी तेरी हाँ का इंतज़ार करते हैं। कहती हो किनारा कर […]

मैं पतंगा हूँ, शमा पर जान लुटाया करता हूँ। रूप रस का लोभी भंवरा नहीं, तितली हूँ.. पराग कण फैलाया करता हूँ। मैं दरिया हूँ, प्यास बुझाया करता हूँ। खारा समन्दर नहीं, झरना हूँ.. संगीत भी सुनाया करता हूँ। मैं दीपक हूँ, अन्धकार मिटाया करता हूँ। भूख,गरीबी,आतंक का समर्थक नहीं, […]

सिमटने लगे हैं घर,अब दादी के दौर के, बिखरने लगे हैं लोग,जब गाँव छोड़ के। हो गया बड़ा मेरा गाँव,सरहद के छोर से, बनने लगे मकां,जब घरों को तोड़ के। सिमट गई नजदीकियां,मिटने की कगार तक, देखे हैं जब से रिश्ते,बस पैसों से जोड़ के। नहीं आता कोई काम,मुश्किल में […]

सुरक्षित हैं बेटियां, मेरे मुल्क आज़ाद में, खामियाँ जितनी भी हैं, बस मेरे किरदार में। छोड़ा है जबसे हमने, संस्कारों के संसार को, उच्छ्र्न्खलता बढ़ रही, हम सबके व्यवहार में। कद्र थी माँ बाप की औ’, समाज का भी भान था, अभिव्यक्ति की आज़ादी पा, बढ़ रहे दुराचार में।   […]

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मैंने बोया, एक बीज शब्द का.. मरुस्थल में। वहां लहलहाई शब्दों की खेती, फिर बहने लगी एक नदी.. शब्दों की कविता बनकर उस मरुस्थल में। एक दिन कुछ और नदियाँ, शब्दों की आकर मिली.. उसी मरुस्थल में, और बन गया एक सागर शब्दों का मरुस्थल में। अब मरुस्थल, मरुस्थल नहीं […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।