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विजयानंद विजय ट्रेन का एसी कोच — जिसमें आम तौर पर सम्पन्न लोग ही यात्रा करते हैं।आमजनों के लिए तो यह शीशे-परदे और बंद दरवाजों के अंदर की वो रहस्यमयी दुनिया है, जिसके बारे में वे जानते तक नहीं हैं। एक परिवार आमने-सामने की छ: सीटों पर अपने पूरे कुनबे […]

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ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र आज कल एक अजीब चलन चल गया है। शिष्टता की सीमा लांघना, बेवाकीपन और बोल्ड कहा जाने लगा है।  अगर उसे कोई स्त्री , स्त्री विमर्श से जोड़कर उसे महिमामंडित करे तो वह बड़ी खबर बन जाती है। उसे वैश्विक स्तर पर भी स्वागत किया जाने लगा […]

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विजयानंद विजय संसद भवन में स्थित गाँधीजी की मूर्त्ति के सामने उनके तीनों बंदर अपनी चिर – परिचित मुद्रा में बैठे थे। वे बार – बार अपना सिर जमीन से टिकाते और सिर हिलाते। उनके अजीब व्यवहार से देखते – ही – देखते  वहाँ नेताओं की भीड़ जमा हो गई। […]

“बस अब और नहीं” सह लिया,सहना था जब। नवउमंग से,बढ़ना है अब। मंज़िल तक,कोई ठौर नहीं। बस अब और नहीं।। संचित ऊर्जा के,दोहन का। समय सुनहरा,है जीवन का। निराशा का कोई दौर नहीं। बस अब और नहीं।। जीवन संगीत है,मधुर ताल है। लक्ष्य प्राप्य है,चाहे विशाल है। सुनना विरोधियों का,शोर […]

राजेश ज्वेल (9827020830) अमेरिका फस्र्ट क्यों है… क्यों वह दुनिया का चौधरी कहलाता है और आर्थिक सम्पन्नता के मामले में भी अमेरिका तमाम मंदी के बावजूद सर्वोच्च क्यों बना हुआ है..? इन सवालों के जवाब ट्रम्पकाल की शुरुआत में ही बड़ी आसानी से खोजे जा सकते हैं… लोकतंत्र की खूबसूरती […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।