रचनात्मकता,खत्म हुई शायद, नकलों का जहाँ,बोलबाला है। झूठे लोगों की,जय-जयकार, सच्चे का मुँह यहाँ काला है। पंगु जहाँ,चढ़ने लगे पहाड़, सज्जन के,मुहँ पर ताला है। जहाँ बैठे भोले,बने सियार समझो,कुछ गड़बड़ झाला है। जहाँ जीते, हारे बैठे हैं, हारों के गले,विजयमाला है। समझ की बहती,नदी नहीं, समझो,अज्ञान का नाला है। […]

शब्दों का नहीं होता कोई आकार या प्रकार, फिर भी शब्द चुभते हैं। शब्दों का नहीं होता है कोई वजन, फिर भी शब्द चोट करते हैं। शब्दों में नहीं होती है ज्वलनशीलता, फिर भी शब्द जलाते हैं। शब्दों में नहीं होते हैं दवा के गुण, फिर भी शब्द मन के […]

बॉलीवुड ने भारत को इतना सब कुछ दिया है…?? तभी तो आज देश यहाँ है..बलात्कार और गैंग रेप करने के तरीके,विवाह किए बिना लड़का-लड़की का सम्बन्ध बनाना और विवाह के दौरान लड़की को मंडप से भगाना तो है ही। चोरी-डकैती करने के नए-नए तरीके,भारतीय संस्कारों का उपहास उड़ाना,लड़कियों को छोटे […]

मित्रों नमस्कार, मेरा यह लेख धन्यवाद स्वरूप मेरे उन अनुयायियों (फालोअर्स)नहीं ,बल्कि उन विरोधियों को समर्पित है जिन्होंने अपने पारदर्शी लेकिन सच से परे होने वाले लेख पर मुझे यह लिखने के लिए प्रेरित किया है। हमेशा से ही सोशल मीडिया पर ऐसे चिकित्सा लेखों की भरमार रही है जिसमें […]

बहुत दूर है तुम्हारे घर से, हमारे घर का किनारा , पर हवा के हर झोंके से , पूछ लेते हैं मेरी जान, हाल तुम्हारा। लोग अक्सर कहते हैं, जिन्दा रहे तो फिर मिलेंगे, पर मेरी जान कहती है, निरंतर मिलते रहे, तो ही जिन्दा रहेंगे। दर्द कितना खुशनसीब है, जिसे पाकर अपनों को याद करते हैं, दौलत कितनी वदनसीब है ,जिसे पाकर लोग, अक्सर अपनों को भूल जाते हैं। इसलिए तो छोड़ दिया सबको, बिना वजह परेशान करना, जब कोई हमें अपना समझता ही नहीं, तो उसे अपनी याद दिलाकर भी क्या करना। जिंदगी गुजर गई, सबको खुश करने में, जो खुश हुए वो अपने नहीं थे, और जो अपने थे मेरी जान, वो भी खुश नहीं हुए। इसलिए संजय कहता है, कर्मो से डरिए , ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ़ कर देता है, परन्तु खुद के कर्म नहीं। #संजय जैन परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब […]

जब भी हमें यकीन हुआ किसी की वफा पर , उसने हमारा विश्वास तोड़ा ज़रूर है। जब भी हमें लगा,अब जिंदगी़ की बाज़ी हारने वाले हैं, अचानक जीत जाते हैं। जहां हमें लगता है,यह रिश्ता हमेशा साथ देगा, वही हाथ छोड़ जाता है। जिसकी वजह से हम खुशी महसूस करते […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।