मैं एक गृहिणी हूँ,और हिन्दी को राष्ट्रभाषा रूप में प्रचारित एंव प्रसारित होने और न हो पाने के कारणों पर मेरा दृष्टिकोण,भाषा अधिकारियों  से वैभिन्यता रखता हो,उनकी दृष्टि में उतना तर्कसम्मत और वैज्ञानिक न हो,इसके बावजूद मेरा दृष्टिकोण एक आम भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व अवश्य करता है, ऐसा मेरा मानना […]

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आओ हम मिलकर,देश में नई अलख जगाते हैं,                                              हिन्दी को उसका खोया सम्मान,फिर से दिलाते हैं। हिन्दी भाषा है,ज्ञान-विज्ञान की, हिन्दी भाषा है,भारत के स्वाभिमान की हिन्दी में […]

हिंदी दिवस पर विशेष…… नए बोल सिखाती है,मुझे ज्ञान कराती है। ए माँ भाषा तू ही मुझे सम्मान दिलाती है॥ नए बोल सिखाती है …….. भारत का है गौरव तू,चमकी बन भानु प्रभा। जन-जन की है सौरभ तू,महकी हर दिशा दिशा। भारत-सुत में तू ही नया स्वाभिमान जगाती है॥ नए […]

  दिल्ली। दिल्ली शहर वैसे तो सत्ता के केंद्र बिन्दु के रूप में जाना जाता रहा है,पर दिल्ली में साहित्यिक हलचल भी सदैव बनी रहती है। दिल्ली साहित्य के बड़े आयोजन का शहर है,ऐसा ही भव्य किन्तु सादगीपूर्ण आयोजन साहित्यिक क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाली संस्था भारतीय साहित्य […]

सच्चे इंसान को झूठा साबित किया जाता है… और हर झूठा आदमी लोगों को सच्चा इंसान दिखता है, कुछ नहीं हो सकता इस देश का… यहां पैसों में हर एक इंसान बिकता है…ll हक छीने जाते हैं यहां गरीब किसानों के… और भ्रष्टाचारी ही यहां सबसे ज्यादा अमीर इंसान दिखता […]

नहीं रोती है आँखें अब, किसी के बुझे चुल्हे पे भूख से तड़पते बच्चों पर, नहीं आता है रहम किसी कोl    नशे में डगमगाते युवाओं के कदम, नहीं जाता है ध्यान किसी का बेटे की याद में बिताते पल पर, टूटती सांसों की डोर परl    नहीं थामता हाथ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।