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ज़िन्दगी के रास्ते इतने आसान न होते, अगर आप हम पर मेहरबान न होते l आप चाहते तो ये काम कल भी हो जाता, हम आज भी इसके लिए परेशान न होते। कितना अच्छा होता,हमारी गिनती इंसानों में होती, आप हिन्दू न होते,हम मुसलमान न होते। ये विश्वास और भरोसे की […]

हम सभी में, कोई न कोई, जानता है, देश की हर भाषा। लेकिन घोर विडम्बना है, कि, हम, आज तक, नहीं जान पाए, अपनी, देह में अवस्थित, उस आत्मा की, ज्ञान-रूपी,भाषा॥                                       […]

बहादुरगढ़ | `हिन्दी दिवस` के अवसर पर ‘आजादी के ७० वर्ष और हिन्दी की दशा’ विषय पर दिल्ली में विचार गोष्ठी कार्यक्रम किया गया। इसमें करुणेश वर्मा ‘जिज्ञासु’ ने हिन्दी भाषा की प्रासंगिकता,प्रमाणिकता और वैज्ञानिकता है अद्वितीय बताया तो स्वयंसेवी संस्था ‘स्नेह’ की दिल्ली प्रदेश संयोजिका ने अपने ओजस्वी शब्दों […]

हिंदी न सिर्फ भाषा है, ये  हमारी  माता  है। कुछ मंदबुद्धि इंसानों के कारण, आज इसकी हो रही उपेक्षा है। माँ के प्यार में, पापा के दुलार में बड़ों की डांट-फटकार में, प्रत्येक रिश्ते में हिंदी बसता है। युवा अंग्रेजी पर अभिमान करता है, हिंदी बिना उनका अधूरा ज्ञान रहता […]

हर मनुष्य को स्वदेश और स्वभाषा से प्रेम होना चाहिए। हिंदी की छोटी बहन उर्दू है। यह हमारी बोलचाल की भाषा में अच्छे से घुल मिल गई है। इस भाषा ने पूरे भारतवर्ष को एकता में पिरोया हुआ है। भारत के एक सिरे से दूसरे सिरे तक हिंदी भाषा कुछ […]

देशभक्त सारे आगे आओ, देश के दुश्मन को मार भगाओ। हम कद्र करते इंसान की, सह सकते नहीं कभी, जो समर्थक हो पाकिस्तान का। जो है गद्दार देश का, वो हमारा भाई नहीं, भारत माँ की संतानों से मेरी कोई लड़ाई नहीं। भगतसिंह के देश को तुम आज़ाद रहने दो, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।