दास्ताँ  दर्दे   दिल  की सुनाते  रहे। वो  हमें   देखकर   मुस्कराते  रहे। टूटकर के बिखरने से क्या फायदा। ये  गलत है  उन्हें हम सिखाते  रहे। जब कभी देखा गम़गीन मैंने उन्हें। आँख  में अश्क अपने  छुपाते रहे। हम शिकायत करें भी तो किससे करें। जब  खुदा खुद […]

नारी—– तुझमें ही प्रेम प्रतिज्ञा का रुप हमने देखा है, तुझमें ही रणचंडी का स्वरुप हमने देखा है। तुम प्रतिमा हाड़ा रानी के शीश दान की हो, तुम पावन गाथा पन्ना धाय के स्वाभिमान की हो। हम तुम्हें दुर्गा काली का अवतार समझते हैं, रानी लक्ष्मीबाई की,पैनी तलवार समझते हैं। […]

अषाढ़ बीता सावन बीता, आंगन रहा रीता का रीता। कुदरत ने घुमाई ऐसी छड़ी लगी अब भादो की झड़ी॥ जब जागो तब सवेरा है, आंख मीची के अंधेरा है। देर है पर नहीं  है अंधेर, सब है ये समय का फेर॥ जल  है  तो  जीवन  है, जल बिन सिर्फ अगन […]

अपना ही नुकसान हुआ, सच कहने पर ज्ञान हुआ। जिसकी जितनी भीड़ बड़ी, उतना वह भगवान हुआ। ‘राम रहीम’ कहा खुद को, फिर वो क्यों शैतान हुआ। जनसेवक फर्जी निकला, उसका ही कल्याण हुआ। मुझे देख तुम मुस्काए, यह भी इक अहसान हुआ। अंतकाल जब आया तो, पंकज का सम्मान […]

रह-ए-इश्क में कुछ तुम भी,अपने से पहल करना। तोहफे़ में मिले आँसू,तो हँस के गजल करना॥ फिर से बखुशी लौटे,वो बज़्म हिरासत में। रौनक में शमअ का भी,मंजूर दखल करना॥ वो बार उठाना मत,लम्हों का सफर लेकर। आए न जिसे ग़म को,रंगों की फसल करना॥ बहकर के बहलते हैं,अश्कों का […]

छोड़कर राहों में मुझको,जो गए तुम इस तरह… एक पल कटती नहीं ये,ज़िन्दगी की बात है। होंठ है खामोश मेरे ये कदम रुकते नहीं… तू नहीं,तेरे बिना ये मुफलिसी हालात है। राग है रंगीनियाँ,साज भी सरताज़ तुम… दिन भी है खामोश और खामोश-सी ये रात है। रोककर अपने कदम जो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।