दोस्तों,एक बात में आप सभी को बताना चाहूंगा कि, लेखक जो भी लिखता है उसे कितना कुछ सोचना पड़ता है और इसकी समीक्षा भी करनी पड़ती है कि, इस बात का हमारे समाज पर क्या कुछ असर पड़ेगा ? वो अपनी तरफ से पूरी कौशिश करता है कि,पाठको के लिए […]

अधरों पर अपने उमंग लिए, बदन मरीन उमड़ता तरंग लिए.. नयनों की पिचकारी लिए टोली, गोपियों की कृष्ण संग होली। भावनाओं के रंग हैं बड़े निराले, कान्हा भंगिमाएं लिए हैं मतवाले.. संकेतों की अभिव्यक्तियाँ अबोली, भींग गई राधा संग सखी अलबेली। नयनों की रंग धार खुमार लिए तेज, कपोलों के […]

गौरी जोहवे वाट, फागुन को ठाट.. हाट रंग-पिचकारी को, छुप गयो जाने कहाँ। देखें हम यहाँ, दो महतारी को। डारूँ उनपे रंग, करूं मैं तंग। और वो झुँझलाए, मन में मेरे बात.. पिचकारी साथ शायद ही बच पाए। गालन मलै गुलाल, बिगाड़ें हाल। आज दिन होरी को, करें हमें परेशान। […]

फागुन की मस्ती में, होली का त्यौहार मनाएं। नफरतों का करे दहन, एक-दूजे को गले लगाएं।। जलाकर बुराईयां होली की आग में, नाचे-गाएं हम रंगों के फाग में। एक-दूजे पर प्यार लुटाएं, होली का त्यौहार मनाएं।।                             […]

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होली तेरे रंग हजार, खेलें सब बेशुमार। भांति-भांति के लोग, खेलें संग रंग गुलाल। मिला देती सबको, अपने रंग में आने से। राग-द्वेष भुलाकर, खेलें होली सभी। जीवन रंगों से भर देती है होली। कितनी रंगीली है तू ए होली।                     […]

किसी से प्यार मिले-न मिले, नफरत नहीं चाहिए.. जिन्दगी के इस सफर में प्यार मिलना चाहिए। जीवन साथी जो मिले, विश्वाश होना चाहिए.. गाड़ी के दो चक्के हैं, साथ चलना चाहिए। जिन्दगी में सब मिले, नफरत न होना चाहिए.. सुख में भी और दुःख में भी एकसाथ चलना चाहिए। कदम-से-कदम […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।