श्रीमती माला महेंद्र सिंह, (एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी,) गोद भराई के एक पारिवारिक कार्यक्रम में जाना हुआ। सभी बहुत उत्साहित थे, लड़के की माँ नंदिनी ने अपनी छोटी भाभी से कहा,”सुमन भाभी आओ सबसे पहले गोद आप ही भरोगी”। मेरे पास बैठी श्रीमती मिश्रा […]

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सेवा में, श्री नरेन्द्र मोदी जी माननीय प्रधान मंत्री, भारत सरकार   विषय : भोजपुरी या हिन्दी की किसी भी अन्य बोली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल न किया जाय.   महोदय, हमारी हिन्दी आज टूटने के कगार पर है. निजी स्वार्थ के लिए कुछ लोगों ने भोजपुरी […]

समसामयिक: अखिलेश यादव के पार्टी से निष्कासन पर विशेष  अर्पण जैन ‘अविचल‘ यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। वंशवाद’शब्द नेहरू-गांधी परिवार की […]

घर छोड़ आई बाबुल का,जो गैरों के वास्ते। मन से जिसने अपनाया,पिया के सब रास्ते।। अज़नबी थे उनसे सब,नाते जोड़ रही है। अपनों का संग प्यारी,बिटिया छोड़ रही है।। नया घर नयी माँ,देवर,ननद,ससुर रूप में बापू को पाया। क्या हम सबने उसे भी, बेटी सा अपनाया। वो नन्ही चिड़िया,पुराना घरोंदा […]

#शशांक दुबे क़लम में धार वही है,पर जज़्बात बदल गये। इतना सहा ज़माने को,हालात बदल गये। लहज़ा वही है बातों का,अल्फ़ाज़ बदल गये। मधुर है गीत उसी तरह,बस साज़ बदल गये। कोई कहाँ रहा युगों तलक,तख्तोंताज़ बदल गये। चंद टुकड़ों के ख़ातिर,मोहताज़ बदल गये। कल कुछ और ही थे,तुम आज […]

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दिल से जो आवाज़ निकलती,वही कहता हूँ। कोरे कागज़ पर स्याह रंग से,कुछ लिखता हूँ। मैं हूँ एक छोटा सा दीपक,रवि नहीं हूँ सच बताऊँ मैं कोई,कवि नहीं हूँ।। जीवन के मकड़जाल में,उलझा रहता हूँ। अनुभव के शब्दजाल,बुनता रहता हूँ। मैं हूँ साधारण सा,बड़ी छबि नहीं हूँ। सच बताऊँ मैं […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।