मैं नारी हूँ, मुझे गर्व है, ईश्वर की श्रेष्ठ कृति हूँ मुझे घमण्ड है। वात्सल्य की मूरत हूँ, प्रेम की प्रेरणा हूँ। सहनशील हूँ सहज हूँ, दुर्गा भी और काली भी। हैं मेरे रूप अनेक पर, सबसे ऊपर मैं ‘माँ’ हूँ। अपने उदर से मैंने नवजीवन को जना है, […]

 डॉ. मनोहर भण्डारी…….. मातृभाषा किसी व्यक्ति,समाज,संस्कृति या राष्ट्र की पहचान होती है। वास्तव में भाषा एक संस्कृति है, उसके भीतर भावनाएं, विचार  और सदियों की जीवन पध्दति समाहित होती है। मातृभाषा ही परम्पराओं और संस्कृति से जोड़े रखने की एकमात्र कड़ी है। राम-राम या प्रणाम आदि सम्बोधन व्यक्ति को व्यक्ति से तथा समष्टि से जोड़ने वाली सांस्कृतिक […]

सोनू को उसकी सहेलियां,`सोनू` नाम से कम,`माधुरी दीक्षित` नाम से अधिक पुकारती थी। उसकी सुंदरता के चर्चे सारे शहर में थे। उस पर उसकी सादगी और संस्कारों ने उसकी सुंदरता में चार चांद लगा दिए थे। सोनू के घर से कुछ ही दूरी पर सुनील नाम का ब्राम्हण लड़का रहता […]

थोड़ी-सी गलती मेरी है,और तुम्हारी भी थोड़ी-सी। कौन मगर गलती करके भी,अपनी गलती को स्वीकारे॥ हमने अपनी मन तृष्णा के, घोड़े जीवन भर दौड़ाए। मैं भी राम नहीं बन पाया, तुम भी खुदा नहीं बन पाए॥ हम दोनों ही भौतिकता की, चाहत की चाहत से हारे। कौन मगर गलती करके […]

साँसों की बज रही बाँसुरी गूंज रहा है मन-वृंदावन, तड़प रही प्राणों की राधा जाने कहाँ छिपा मनमोहन। छलिया तन-कदम्ब पर बैठा रचता चीरहरण की लीला, कर्मों की यमुना में डूबा हर गोपी का तन-मन गीला। हर आँचल में भरी निराशा, सिसक रहा है आँगन-आँगन॥ सम्बन्धों की इस मथुरा में […]

भोर का खुला आसमान नव प्रभात की बेला में, दोनों हाथों को फैलाकर उड़ जाऊँ पंछी बनकर, और नाप लूँ नभ को उम्मीदों के पंख लगाकर। इस छोर से उस छोर तक दूर क्षितिज में खो जाऊँ, अपना अतीत बनकर या में तितली बनकर, मंडराऊँ फूल-फूल पर। रंग-बिरंगे फूलों की […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।