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विदा होते ही आँखों की कोर में आँसू आ ठहरते, और आना-जल्द आना कहते ही ढुलक जाते आँसू, इसी को तो रिश्ता कहते जो आँखों और आंसुओं  के बीच मन का होता है, मन तो कहता और रहोl मगर रिश्ता ले जाता, अपने नए रिश्ते की ओर जैसे चाँद का […]

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अशोक काम की तलाश में गाँव से शहर आया। पढ़ा-लिखा ज्यादा था नहीं,इसलिए मजदूरी करने लगा, लेकिन उसका साथी मजदूरों से अक्सर झगड़ा होता था। कारण था उसका बातचीत में गाली-गलौज का इस्तेमाल। इसलिए कुछ ही दिनों में काम से निकाल दिया जाता था। बेकारी के समय खर्चा चलाना मुश्किल […]

हिन्द और हिन्दी की जय-जयकार करें हम, भारत की माटी,हिन्दी से प्यार करें हम l भाषा सहोदरी होती है,हर प्राणी की, अक्षर-शब्द बसी छवि,शारद कल्याणी की.. नाद-ताल,रस-छंद,व्याकरण शुद्ध सरलतम, जो बोले वह लिखें-पढ़ें, विधि जगवाणी की.. संस्कृत सुरवाणी अपना, गलहार करें हमl हिन्द और हिन्दी की,जय-जयकार करें हम, भारत की माटी,हिन्दी से प्यार करें हमl असमी,उड़िया,कश्मीरी,डोगरी,कोंकणी, […]

दिखावे की होड़ भी, लगती मृगतृष्णा-सी .. जब पैसों के पीछे, भागता है इंसान| समय और पैसा, जैसे रिश्तों से ज्यादा.. अहमियत रखता हो, तभी दौड़ -भाग के खेल में हो जाते हैं रिश्ते कमजोर| और तो और, दिखावे की होड़ में.. उड़ने पर जल जाते, उम्र के पँख | शायद, […]

ओ हक़ीक़तों की दुनिया, मुझको मेरा यार लौटा दे.. संग हवा के खेलता था जो, वैसा ही अखबार लौटा दे। जाने किन रंगों से तुमने, उसका वर्ण भिगो दिया है.. दिखलाकर कितने मोती, सपनों मे यूं डुबो दिया है। हमने भी तो खेली थी वो, बिन रंगों की एक होली.. […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।