sushama malik
मय्यत में मेरी तुम सभी चले आना,
भूले से भी न तुम आँसू बहाना।
उठाकर जनाजा कंधों पर अपने,
मुझे शमशान तक सभी छोड़ आना॥
होंगे उस वक़्त वो नींद में मगरूर,
भूले से भी न उसे तुम जगाना।
मय्यत में मेरी तुम सभी चले आना॥
मुझसे अलग भी दुनिया है उसकी,
   उसे कहो तुम सपनों में खो जाना।
   मुझसे प्यारी तो वो निंदिया उसे है,
   उसकी निंदिया में न विघ्न अड़ाना।
   मय्यत में मेरी तुम सभी चले आना॥
भोर में जब अधखुली हो आंख उसकी,
     ‘मलिक’  की याद न उसको दिलाना।
     कहना थी वो बस एक सपने जैसी,
     हँसते खेलते यूं ही उसे तुम भुलाना।
     मय्यत में मेरी तुम सभी चले आना॥
हुई अब चिता की अग्नि शांत तो,
   धीरे से तुम उसे ये किस्सा सुनाना।
   विघ्न पड़े न उस बेवफा की नींद में,
   न बनाना पड़े अब उसे कोई बहाना।
   उन्मुक्त गगन में अब स्वछंद विचरे वो,
   ‘सुषमा’ न यूं तुम उसे कभी सताना।
   मय्यत में मेरी तुम सभी चले आना॥
              #सुषमा मलिक
परिचय : सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१
तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास
रोहतक में ही शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित 
सुषमा मलिक अपने कार्यक्षेत्र में विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल भी हैं। 
सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। 
विविध अखबार और पत्रिकाओ में आपकी लेखनी आती रहती है। उत्तर प्रदेश की साहित्यिक संस्था ने सम्मान दिया है। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है। 

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