मन की आस

Read Time1Second
 shakuntala
जब चाहो तुम कुछ पाना
कुछ ऐसा पाना जो कठिन हो बहुत
तब तुम करना दृढ़ संकल्प,
बढ़ना आगे सिर्फ अपने भरोसे
दूसरों से नहीं रखना कोई आस,
मुश्किलों से तुम घबराना जरा भी नहीं
हिम्मत का दामन तनिक भी
ढीला मत करना तुम,
धूप भरी दोपहरी
और तपती राहों में,
तुम मुरझाने मत लगना
जब कोई हमसफर नजर न आए
तो तुम थककर रूकना मत,
धीरे-धीरे ही सही बस
कदम आगे बढ़ाते रहना,
कठिन काम जो सरल करना है
तो दिन-रात उसमें जुटे रहना है,
एक हिम्मत एक आस के साथ,
अनवरत आगे बढ़ते रहना है।
ताकि तुम पा सको,
वो कठिन बहुत कठिन
जो हो गया है अब सरल
तुम्हारे लिए,
और वो आज भी कठिन है
औरों के लिए,
जो सब साधारण थे
तुम जैसे,
मगर तुमने
कर दिखाया असाधारण
मन की आस को थामे॥
#शकुन्तला पालीवाल
परिचय : शकुन्तला पालीवाल की जन्म तिथि-३ मई १९८६ है। आपका निवास उदयपुर (राजस्थान) के भुपालपुरा में है। शिक्षा एम.एस-सी.(कृषि जैव प्रौद्योगिकी एवं आणविक जीव विज्ञान) सहित बी.एड.,एम.ए.(हिन्दी साहित्य) भी है। कार्यक्षेत्र में आप सहायक कृषि अधिकारी हैं। साहित्यिक प्रगति में अनेक विधाओं पर लेखन (हाईकू,कहानी लेखन,कविता लेखन,लघुकथा लेखन आदि) कई पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। आपका प्रथम काव्य संग्रह प्रकाशन हेतु प्रक्रिया में है। 
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

परास्त-ज्ञान

Mon Jan 29 , 2018
     रमनसिंह सब्जियां लेकर मुड़ा ही था कि उसने अनायास सामने पड़ गए मिश्र जी से दो-तीन सवाल एक साथ कर डाले-‘कैसे हैं सर ?,प्रैक्टिस  कैसी चल रही है ?,आप यहां कैसे?’ – ‘एकदम ठीक’, मिश्र जी ने पहले सवाल का जवाब देना ही काफ़ी समझा।    ज्ञानसिंह मिश्र […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।