युग

0 0
Read Time1 Minute, 48 Second
rajeshwari
त्रेता युग बीता घोर कलयुग आया,
दम घुटने लगा इंसान का
प्रकृति के खिलाफ जाकर
सांसों के भी लाले पड़ गए।
जहरीली बन गई हवा भी,
पर्यावरण को ख़तम किया
इंसान में से ख़त्म भावनाएं,
मोबाईल का गुलाम बना।
इंसानी रिश्ते हुए चकनाचूर,
जानवरों को साथ लिया
खुद का अपनापन खो डाला,
पुरखों को नजरअंदाज किया।
कार्टूनों की दुनिया में बसकर,
मस्तिष्क को कब्रिस्तान किया
कुछ भी उल्टा-सुल्टा खाकर,
हाथी-सा अभिमान किया।
बना मशीन का दास आदमी,
और खुद को सम्मान दिया
अजन्मे को भविष्य दिखाता,
कैसा मूर्ख गुमान किया।
नोटों की ढेरी पर बैठा था,
खुद को खुदा मान लिया
परतन्त्र हुआ पल-पल रोया,
देखो कैसा हाल हुआ।
एक-दूजे को खाता आदमी,
अपना-पराया भूल गया
गूगल पर ढूंढे दूध के रिश्ते,
नासमझ अपने और पराए।
फेसबुक की दुनिया ही,
अपनी,ये कैसा परिवार हुआ
मशीनी दुनिया में निकृष्ट,
देखो सभ्यता का हास हुआ।
झुक गए कंधे,
सब-कुछ छूट गया
सब-कुछ कचरा बना,
ये कैसा अंतकाल हुआ॥
        #श्रीमती राजेश्वरी जोशी

परिचय : श्रीमती राजेश्वरी जोशी का निवास अजमेर (राजस्थान) में है। आप लेखन में मन के भावों को अधिक उकेरती हैं,और तनुश्री नाम से लिखती हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

किसान

Sat Jan 27 , 2018
आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ,कहानी एक किसान की, धूप-छाँव सह करता खेती,गेहूँ,मक्का धान की। सुबह सवेरे जल्दी उठता,फिर अपने खेतों में जाता, घूम-घूमकर क्यारी-क्यारी,फसलों से वो बातें करता। लिए फावड़ा नित हाथ में,डौल-डौल पर डोल रहा, एक क्यारी में नाका खोले,एक में पानी बंद कर रहा। बढ़ जाती जब घास खेत […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।