युग

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rajeshwari
त्रेता युग बीता घोर कलयुग आया,
दम घुटने लगा इंसान का
प्रकृति के खिलाफ जाकर
सांसों के भी लाले पड़ गए।
जहरीली बन गई हवा भी,
पर्यावरण को ख़तम किया
इंसान में से ख़त्म भावनाएं,
मोबाईल का गुलाम बना।
इंसानी रिश्ते हुए चकनाचूर,
जानवरों को साथ लिया
खुद का अपनापन खो डाला,
पुरखों को नजरअंदाज किया।
कार्टूनों की दुनिया में बसकर,
मस्तिष्क को कब्रिस्तान किया
कुछ भी उल्टा-सुल्टा खाकर,
हाथी-सा अभिमान किया।
बना मशीन का दास आदमी,
और खुद को सम्मान दिया
अजन्मे को भविष्य दिखाता,
कैसा मूर्ख गुमान किया।
नोटों की ढेरी पर बैठा था,
खुद को खुदा मान लिया
परतन्त्र हुआ पल-पल रोया,
देखो कैसा हाल हुआ।
एक-दूजे को खाता आदमी,
अपना-पराया भूल गया
गूगल पर ढूंढे दूध के रिश्ते,
नासमझ अपने और पराए।
फेसबुक की दुनिया ही,
अपनी,ये कैसा परिवार हुआ
मशीनी दुनिया में निकृष्ट,
देखो सभ्यता का हास हुआ।
झुक गए कंधे,
सब-कुछ छूट गया
सब-कुछ कचरा बना,
ये कैसा अंतकाल हुआ॥
        #श्रीमती राजेश्वरी जोशी

परिचय : श्रीमती राजेश्वरी जोशी का निवास अजमेर (राजस्थान) में है। आप लेखन में मन के भावों को अधिक उकेरती हैं,और तनुश्री नाम से लिखती हैं।

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।