‘बुढ़िया’ कहकर बुलाता है…

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ujval jhaa
न चाहते हुए भी क्यूँ वो मुझपे चिल्लाता है,
पता नहीं,अब बात करने से भी क्यूँ कतराता है ?
मैं जाती हूँ पास उसके,पर वह बहुत दूर चला जाता है,
अब प्यार से भी नहीं कभी `अम्मा` कहकर बुलाता हैl
पता है! मेरा बेटा भी अब मुझे `बुढ़िया` कहकर बुलाता हैll

जब सुबह वह उठता था तो पहले मेरे पास ही आता था,
मेरे हाथों से खाकर ही वह कार्यालय जाता था
एक छोटी-सी बात लेकर भी वो मेरे पास आता था,
मैं कितना भी गुस्सा कर जातीं,पर वो कभी न चिल्लाता थाl
पता है ? मेरा बेटा भी पहले मुझे `अम्मा` कहकर बुलाता थाll

अब घर आकर वो अपनों में घुल-मिल जाता है,
मेरी दवा का समय भी वो याद रख न पाता है
अगर कुछ काम कह दूँ उसे,तो मुँह फेर चला जाता है,
मुझे क्या पता ? कि बेटा भी ऐसे बदल जाता हैl
पता है ? मेरा बेटा भी अब मुझे `बुढ़िया` कहकर बुलाता हैll

ऐसी क्या मजबूरी है ? कि एक रिश्ता भी निभा न पाता है,
चलते-चलते गिर जाऊं अगर,तो देखकर भी उठा न पाता है
ऐसे ही बीमार पड़ी रहती हूँ,फिर भी वो हाल न पूछने आता है,
जी चाहता है वज़ह पूछूँ,पर वो बिन बोले ही सब कह जाता हैl
पता है ? मेरा बेटा भी अब मुझे `बुढ़िया` कहकर बुलाता हैll

#उज्जवल कुमार झा 

परिचय : उज्जवल कुमार झा की जन्मतिथि-३०जून १९९७ और जन्म स्थान-बसुआरा(दरभंगा,बिहार)है। आपका स्थाई पता बसुआरा ही है। बिहार शहर-बसुआरा के उज्जवल झा वर्तमान में स्नातक के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं। आपकी लेखन विधा-कविता,कहानी और गीत है। आपको प्रतिभा सम्मान सहित अन्य पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। उपलब्धि साहित्य टाइम्स टीवी पर कार्यक्रम आना है। लेखन का उद्देश्य-समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करना और चेतना जागृत करना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।