राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय सेना को नमन…

kailash Singhal
( सशत्र सेना ध्वज दिवस पर विशेष)
राष्ट्रीय ध्वज
शौर्य शांति साहस,
तीन रंगों में
राष्ट्र प्रेम सन्देश
सेना को नमन है।
मैं गीत लिखूं
पर कैसे लिखूंगा,
मन के भाव
कागज़ पर लहू
के रंग में रँगे हैं।
गौरी के गाल
सियासत की चाल
जैसे लगते,
पायल लगे जैसे
ज़ंजीर हो पैरों में।
अधरों पर
कुछ लिखूं तो कैसे,
लाली लगती
सीमाओं पर खून
सेना का बहा जैसे।
मैं कैसे करुं
प्रणय निवेदन,
अभिसार में
आलिंगन के घेरे
लगते कैद जैसे।
ज़ुल्फ़ों पे लिखूं
पर कैसे लिखूंगा,
फंसी दिखती
जुएं भ्रष्टाचार की
ज़ुल्फ़-ए-खम में हैं।
जब तलक
देश की सीमा पर
खून बहेगा,
श्रृंगार शब्द कैसे
लिखे मेरी कलम।
मन लेता है
यह संकल्प मीत,
पहले दूर
करुंगा सीमा वाद
फिर लिखूंगा गीत।
हमने लिखे
हैं गीत उन पर,
शहीद हुए
सीमा पर जाकर
शत-शत नमन।
सीमा रक्षा में
प्राणों की आहुतियां,
सबसे बड़ी
इबादत हो गई
शहादत नमन।
जय हिंद में
राष्ट्र प्रेम बसा है,
पूजा पद्धति
सीमा रक्षा और
मंत्र ‘वंदे मातरम्’ है।

#कैलाशचंद्र सिंघल

परिचय: कैलाशचंद्र सिंघल का नाता मध्यप्रदेश से हैl आपकी जन्म तारीख- २० दिसम्बर १९५६ और जन्मस्थान-धामनोद(धार) हैl हायर सेकन्डरी तक शिक्षित श्री सिंघल का व्यवसाय(कॉटन ब्रोकर्स)हैl आप धामनोद में समाज की संस्थाओं से जुड़े हुए हैंl लेखन में आपकी विधा-हाइकु,तांका, गीत और पिरामिड हैl भोपाल से प्रकाशित समाचार-पत्र में कुछ रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। पिछले 30 वर्ष से लेखन में मगन श्री सिंघल की खासियत यह है कि,कवि सम्मेलनों का सफल आयोजन करते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय और दिवंगत कवियों की रचनाओं को मंचों पर सस्वर उनके नाम से प्रस्तुत करना है,जिसका पारिश्रमिक नहीं लेते हैं।

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