पुनर्नवा

Read Time2Seconds

amitabh priydarshi
वह रोज जी उठता है,पुनर्नवा की तरह।
जी उठना उसकी विवशता है,
क्योंकि सहज मिल जाती है,
हवा,बारिश,धूप और पानी भी कभी-कभी।
फिर वह पनपता,फुनगता और बढ़ता ही चला जाता है।
पर इतना भी सहज नहीं है बढ़ना!
इस बीच कई बार पददलित होता,
रौंदा जाता हजारों बार,पांवों तले,
फिर भी वह स्वयं को जीवित रखता है।
क्योंकि,
वह जानता है,कई उम्मीदें जुड़ीं हैं उससे।
किसी को उसकी पत्तियों की जरूरत,
तो किसी को तने की ख्वाहिश।
कई तो जड़ें तक उखाड़ ले जाते हैं।
फिर भी बच गई जड़ के एक रेशे से वह,
वह खुद को पुन: जीवित कर लेता है।
क्योंकि वह जानता है,अपनी जिम्मेदारियों को…
कई आशाओं को,
जो उससे जुड़ीं हैं…
चाहकर भी मर नहीं सकता वह।
भले लाख झंझावतों को पड़े झेलना।
लुटना पड़े,नुचना पड़े,या उखड़ना ही क्यों ना पडे़ ?
जब तक उसका एक-एक टुकड़ा उपभुक्त न हो जाए,
मर-मरकर जीना उसकी विवशता है।
इसीलिए वह उपेक्षित होकर भी,
कोई शिकायत नहीं करता।
भले उसे कोई नहीं सींचता,
न खाद,न पानी।
जो सहज मिल गया,
बस उसी पर जी लिया।
एक पिता की तरह,
क्योंकि,पुनर्नवा है वह॥

#अमिताभ प्रियदर्शी 

परिचय:अमिताभ प्रियदर्शी की जन्मतिथि-५ दिसम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-खलारी(रांची) है। वर्तमान में आपका निवास रांची (झारखंड) में कांके रोड पर है। शिक्षा-एमए (भूगोल) और पत्रकारिता में स्नातक है, जबकि कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता है। आपने कई राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक अखबारों में कार्य किया है। दो अखबार में सम्पादक भी रहे हैं। एक मासिक पत्रिका के प्रकाशन से जुड़े हुए हैं,तो
आकाशवाणी रांची से समाचार वाचन एवं उद्घोषक के रुप में भी जुड़ाव है। लेखन में आपकी विधा कविता ही है।
सम्मान के रुप में गंगाप्रसाद कौशल पुरस्कार और कादमबिनी क्लब से पुरस्कृत हैं। ब्लाॅग पर लिखते हैं तो,विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा रेडियो से भी रचनाएं प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-समाज को कुछ देना है

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मोदी जी,आपने तो मैकाले को भी पीछे छोड़ दिया

Wed Nov 8 , 2017
आदरणीय मोदी जी!,आप जिस तरह झूम-झूमकर मंत्रमुग्ध कर देने वाला भाषण हिन्दी में देते हैं,क्या उसी तरह का प्रभावशाली भाषण अंग्रेजी में भी दे सकते हैं ? आप जिस तरह अपने को हिन्दी में अभिव्यक्त कर लेते हैं,क्या उसी तरह अंग्रेजी में भी कर सकते हैं ? नहीं न ? […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।