ख़ुशी का विभाजन

5
Read Time2Seconds

kusum
`जसोदा`…..अम्माँ जी की काम वाली बाई,प्रश्नवाचक आश्चर्य से देखती हुई कुछ पूछे,उसके पहले ही अम्माँ जी ने स्पष्टीकरण कर दिया…l
`सुन …! सामने वाली सुनीता ने दीए तो ले लिए पचास,
पर रुई बाती बनाने का टाइम बिलकुल न है उसके पास।
और दीवाली के दिनों में बाती बनाकर रखना मेरा टाइम पास है।
तेरे को पैसे की बहुत ज़रूरत है न! और मेरे से मदद की,वो भी उधार नहीं…तो ऐसा कर। ये पचास बाती का पैकेट विनीता को बेच आ-कहना बीस रुपए का है।
उससे पैसे लेकर तू रख लेनाl
तुझे पैसे मिलेंगे,और मुझे आत्मसंतोष। विनीता के सारे दीए भी जल सकेंगे।
सही है न!`
अब जसोदा निरूत्तर थी।

                                                                        #कुसुम सोगानी

परिचय : श्रीमती कुसुम सोगानी जैन का जन्म १९४७ छिंदवाड़ा (म.प्र.) में हुआ है|आपने शालेय  शिक्षा प्राप्त करने के बाद बीए(इंग्लिश व अर्थशास्त्र),एमए(हिंदी साहित्य),एमए(समाजशास्त्र) व  विशारद(हिन्दी साहित्य रत्न) किया हैं| साथ ही इलाहाबाद (हिन्दी प्रचारिणी सभा) से संस्कृत मे कोविद्, सुगम गायन-वादन और झुंझुनू (राजस्थान)वि.वि.से पीएचडी जारी है|आप हिन्दी साहित्य,अंग्रेज़ी भाषा, संस्कृत,मारवाड़ी और राजस्थानी सहित गोंडवाना भाषा ही नहीं, मालवीभी लिखना-पढ़ना तथा अच्छा बोलना जानती हैं| आप आकाशवाणी इंदौर में कई कार्यक्रमों का संचालन कर चुकी हैं| यहाँ सालों तक कई कहानी प्रसारित हुई है| आपकी अभिरुचि रचनात्मक लेखन और कहानी कविता भजन तथा जैन धर्म के विषय पर लेखन में है| कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होने के साथ ही आप कई सामाजिक-धार्मिक संस्थानों मे सहयोगी के रूप में सक्रिय है |आपका निवास इंदौर में है|

0 0

matruadmin

5 thoughts on “ख़ुशी का विभाजन

  1. बहुत ही बढिया लेखन ,शार्ट एन्ड स्वीट पर बहुत बडा मैसेज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

समय

Fri Oct 27 , 2017
समय की रेत पर चलकर, हमें यह भी दिखाना है  फ़र्ज़ दोस्ती का अभी, हमें तो पूरा निभाना हैl     न सोच कि,टाँग फँसाकर, गिराता यह जहां हमको  कहीं पर साथ देता, कहीं मुंह फेरे ज़माना हैll                           […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।