क्यों उठे हाथ दुःशासनों के पक्ष में…

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rameshwar
(काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हो रही घटना पर)
क्या यही अब नीति होगी,
देश और इस काल की।
वह धरा साक्षी बनेगी,
जहाँ भक्ति होती महाकाल की।
है बेटियाँ यदि मान तो,
क्यों हुआ यह अपमान है।
सिसकियाँ अनसुनी रही,
आखिर ये कौन-सा सम्मान है?
चलाना चाहिए घन,
जिन पापियों के वक्ष पे।
क्यों उठे हैं हाथ,
अबकी दुःशासनों के पक्ष में।
है प्रश्न गहरा यक्ष का,
क्यों युधिष्ठिर मौन है?
या है पक्षपात धृतराष्ट्र का,
देख कौरवों को मौन है।
क्यों द्रौपदी पर ही केन्द्रित,
बाजी जीत और हार की।
चीरहरण,यदि विजयी कौरव,
हारे तो फिर से बाजी मान की।
ओ! नीति के निर्धारकों,
ओ! कौरवों के प्रतिपालकों।
क्यों कर रहे हो गुमराह,
एक और सत्य को…॥
                                                                      #रामेश्वर मिश्र
परिचय: रामेश्वर मिश्र वर्तमान में भदोही(उत्तर प्रदेश) में बसे हुए हैं। फिलहाल अभियांत्रिकी के छात्र हैं। कविताएं, कहानी इत्यादि पढ़ना-लिखना आपकी पसंद है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।