क्यों उठे हाथ दुःशासनों के पक्ष में…

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rameshwar
(काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हो रही घटना पर)
क्या यही अब नीति होगी,
देश और इस काल की।
वह धरा साक्षी बनेगी,
जहाँ भक्ति होती महाकाल की।
है बेटियाँ यदि मान तो,
क्यों हुआ यह अपमान है।
सिसकियाँ अनसुनी रही,
आखिर ये कौन-सा सम्मान है?
चलाना चाहिए घन,
जिन पापियों के वक्ष पे।
क्यों उठे हैं हाथ,
अबकी दुःशासनों के पक्ष में।
है प्रश्न गहरा यक्ष का,
क्यों युधिष्ठिर मौन है?
या है पक्षपात धृतराष्ट्र का,
देख कौरवों को मौन है।
क्यों द्रौपदी पर ही केन्द्रित,
बाजी जीत और हार की।
चीरहरण,यदि विजयी कौरव,
हारे तो फिर से बाजी मान की।
ओ! नीति के निर्धारकों,
ओ! कौरवों के प्रतिपालकों।
क्यों कर रहे हो गुमराह,
एक और सत्य को…॥
                                                                      #रामेश्वर मिश्र
परिचय: रामेश्वर मिश्र वर्तमान में भदोही(उत्तर प्रदेश) में बसे हुए हैं। फिलहाल अभियांत्रिकी के छात्र हैं। कविताएं, कहानी इत्यादि पढ़ना-लिखना आपकी पसंद है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।