
Next Post
अपने नाम हो गई...
Tue Sep 19 , 2017
जन्नते नजर की फिक्र में जिंदगी तमाम हो गई, दर्द से सुकूँ नहीं मिला,नींद भी हराम हो गई। देख भर लिया है ख्वाब में बस यही गुनाह कर दिया, लोग मुझसे पूछने लगे-बात इतनी आम हो गई। खुद ही शर्म आ रही मुझे रहमतों की मांगते दुआ, क्या करूं ये […]

पसंदीदा साहित्य
-
November 4, 2020
लम्बी आयु का व्रत
-
November 6, 2020
प्रश्न का उत्तर प्रश्न
-
November 18, 2019
हिंदी को बोलियों से मत लड़ाइए
-
November 16, 2017
चंचलता
-
January 5, 2020
एक गर्भस्थ कन्या शिशु की पुकार
