अच्छी बात नहीं

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praveen gahlot
बेवजह गुस्सा,चिड़चिड़ापन, अच्छी बात नहीं।
बेमौत न कर मेरे नाम कफ़न अच्छी बात नहीं॥
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यहाँ-वहाँ,इधर-उधर मत दिखा अपनी अदा।
मेरे दिल को न कर परेशान अच्छी बात नहीं॥
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बारिश भी वहीं है,जहाँ तुमने साथ छोड़ा था।
बिन मौसम के बरसे सावन अच्छी बात नहीं॥
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तू मुस्कुराए तो मैं भी मुस्कुराऊँ इस मौसम में।
तेरे लिए उदास रहे ये चमन, अच्छी बात नहीं॥
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मेरी जिंदगी भी अब इस तरह से इतराती है।
दुश्मनों को होती है जलन अच्छी बात नहीं॥
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मैं मोती बन के रहूं सदा ही तेरी माला में।
घर में टूटा रहे आँगन,अच्छी बात नहीं॥
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अपने परिवार की उम्मीदों का सागर हूं मैं।
बर्बाद करुं अपना ही जीवन, अच्छी बात नहीं॥
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नदी पार करने में लेता है दुश्मनों का सहारा।
इस गाँव में वो इतना नादान, अच्छी बात नहीं॥
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तन हो तन में,प्राण हो जीवन में ऐ कृष्ण।
तेरे बिना सूना रहे मेरा मकान, अच्छी बात नहीं॥
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कैसे मिलेगी मोहब्बत में मंज़िल तुझे ‘अरमान’।
खवाब की मार से टूटे जो बदन अच्छी बात नहीं॥

 #प्रवीण गहलोत
परिचय : प्रवीण गहलोत,राजस्थान के जोधपुर से हैं। आपको शायरी की दुनिया में अरमान बाबू के नाम से जाना जाता है। आपकी जन्मतिथि ११ अगस्त १९९४ और जन्मस्थली जोधपुर के पास छोटा सा गाँव है। आप अपने देश-परिवार से बहुत प्यार करते हैं। सिविल इंजीनियर की पढ़ाई की हुई है। इंजीनियरिंग महाविद्यालय में प्राध्यापक भी रह चुके हैं। कार्य के प्रति विशेष रुचि रखते हैं,इसलिए दुबई से प्रस्ताव आने पर अब वहां यही कार्य क्षेत्र अपनाने की तैयारी है। रुचि संगीत,समाजसेवा,नए पर्यटन स्थान पर घूमना है। आप हिंदी के साथ उर्दू में भी रचनाएं लिखते-कहते हैं। उर्दू में रचनाएँ प्रकाशित हुई है। इनकी लेखनी का उद्देश्य भारत के युवाओं को हिंदी के प्रति अपनी कलम से जागरुक करना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।