भारत माँ चालीसा

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sani gupta
जय जय जय हे भारत माता।
तुम त्रिभुवन की भाग्य विधाता॥

वेद,पुराण,तुमहि नित ध्यावै।
धरती,अम्बर ध्यान लगावै॥

शस्य श्यामलां धरा तुम्हारी।
इस जहान में सबसे प्यारी॥

छः ऋतुएं भारत में आए।
शरद शिशिर हेमंत सुहाए॥

ग्रीष्म,वसंत व वर्षा राजे।
चहुँदिसि भारत महिमा साजे॥

निशदिन सागर पाँव पखारे।
भागीरथी सृष्टि को तारे॥

हिन्द अरब नित शीश झुकावे।
भारत माता के गुण गावे॥

गंगा,सरयू,सिंधु निवासा।
ब्रह्मपुत्र नर्मदा के वासा॥

कावेरी,यमुना नित बहती।
जय जय जय भारत माँ कहती॥

रावी,झेलम पतित पावनी।
यती सती के मनहि भावनी॥

सिर पर मुकुट हिमालय साजे।
विंध्याचल पश्चिम में राजे॥

अरावली की कीर्ति बखानी।
नीलगिरि पावन सम्मानी॥

इसी कंदरा ऋषि मुनि रहते।
मानसरोवर इनसे बहते॥

अद्भुत रक्षक बना हिमालय।
शिव शम्भू का यह है आलय॥

अति विशाल भारत की गाथा।
सदा झुकाओ इसको माथा॥

इनसे जड़ी-बूटियां मिलती।
अद्भुत उपवन इन पर खिलती॥

यही बसी रहती माँ अम्बे।
वैष्णो,काली या जगदम्बे॥

यह गीता का गान सुनाया।
रामचरित मानस यह गाया॥

वेद,पुराण की अद्भुत माया।
जन-जन को यह देश सुनाया॥

सदा भागवत ज्ञान सुनाता।
बुद्धि विवेक इसी से आता॥

कृष्ण ने पावन गीता बाँची।
रामचरित है जग में साँची॥

कालिदास तुलसी सम ज्ञानी।
धन्वंतरि अश्वनि विज्ञानी॥

वेदव्यास जी मान बढ़ावै।
सब मिल भारत गान सुनावै॥

नीति निपुण हर शास्त्र के ज्ञाता।
भारत महिमा जग विख्याता॥

काशी मथुरा यही निवासा।
अति पावन प्रयाग करि वासा॥

अमरनाथ की महिमा भारी।
अवध भूमि जन हित उपकारी॥

राम,कृष्ण इस भूमि पधारे।
शिव अवधरदानी तन धारे॥

पवन पुत्र है सदा सहायक।
श्री गणेश पूजन के लायक॥

जहाँ लक्ष्मण भरत से भ्राता।
भ्रात प्रेम में राज न भाता॥

शीतल चन्दन यही निवासा।
पीपल बरगद पूजा जाता॥

प्रथम सूर्य जिस देश में आये।
शीतल चंद्र शीश नित ध्याये॥

मनु ने मानव यही बनाए।
भागीरथ हैं गंगा लाए॥

ज्योतिष शास्त्र जहाँ जग सीखा।
प्रथम शून्य तुम में ही दीखा॥

विश्वगुरु बन ज्ञान सिखाया।
धर्म ज्ञान तुम से ही आया॥

भारत माँ जग दास तुम्हारा।
तुमने ही जग को उद्धारा॥

माँ की महिमा कब तक गाऊँ।
पुत्र हूँ मैं क्या मान बताऊँ॥

जान दिया है मान दिया है।
माँ तुमने सम्मान दिया है॥

सदा मात कृपा बरसाओ।
राम कृष्ण फिर से उपजाओ॥

जो यह पढ़े भारत चालीसा।
भक्ति बढ़े बजरंगबली-सा॥

‘मदन’ कहत है नत कर माथा।
सब मिल गाओ भारत गाथा॥

 #सनी गुप्ता ‘मदन’

परिचय: सनी गुप्ता ‘मदन’का निवास तथा जन्म स्थान-आम्बेडकर नगर(उत्तर प्रदेश)है। आप १२ अप्रैल १९९४ में जन्में हैं। वर्तमान में बी.टेक. में अध्ययनरत हैं। लेखन कॊ ही भविष्य बनाने के लिए प्रयासरत श्री गुप्ता की रचनाएँ कई पत्रिकाओं में छपती रहती हैं। आपको नारी साहित्य भारती,युवा कवि सम्मान तथा विद्यालयों से भी सम्मान मिला है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।