तीन बंदर

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विजयानंद विजय

संसद भवन में स्थित गाँधीजी की मूर्त्ति के सामने उनके तीनों बंदर अपनी चिर –
परिचित मुद्रा में बैठे थे। वे बार – बार अपना सिर जमीन से टिकाते और सिर
हिलाते।
उनके अजीब व्यवहार से देखते – ही – देखते  वहाँ नेताओं की भीड़
जमा हो गई। सभी अपने – अपने अर्थ – निष्कर्ष निकालने लगे। एक नेता ने कहा – ”
ये गाँधीजी से अफसोस जता रहे हैं। ”
दूसरे ने कहा -“नहीं।ये उनसे माफी माँग रहे हैं। ” तीसरे नेता ने कहा – ”
नहीं। नहीं। ये उनसे कह रहे हैं कि अब आपकी नैतिक शिक्षाओं का कोई मतलब और
महत्व नहीं रह गया है। ”
चौथे नेता ने स्पस्ट किया – ” ऐसा नहीं है,भाई।एक बंदर मुँह पर हाथ रखकर
चुपचाप बुरा देखने और बुरा सुनने को कह रहा है। दूसरा बंदर कान बंद कर बुरा
होते देखने और जी भरकर बुरा बोलने को कह रहा है, और तीसरा बंदर अपनी आँखें बंद
करके कह रहा है कि खूब बुरा बोलो और बदले में बुरा सुनो भी। ”

 

लेखक परिचय : लेखक विजयानंद विजय बक्सर (बिहार)से बतौर स्वतंत्र लेखक होने के साथ-साथ लेखन में भी सक्रिय है |

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matruadmin

3 thoughts on “तीन बंदर

  1. विजयानन्द जी को उनकी दोनो रचनाओं के लिए बधाई ! खासकर दूसरी लघु कथा काफी सामयिक व सशक्त है ।

  2. बिलकुल सही। आजकल के बच्चे अपनी मिट्टी को भूल गये हैं। हमारे आधार तो गाव से ही शुरू होते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।