उजाला

Read Time2Seconds
vinod silva
नहीं मोहताज
मेरे जीवन का उजाला
किसी दीपक का
किसी सूरज का
किसी रोशनी का
जो चमकता है
अपनी प्रतिभा से
अपने ही नूर से
जो चमकता है
अंधेरे में भी
मुझे उजाला
नहीं मिला विरासत में
मुझे उजाला
नहीं मिला राजभवनों से
मुझे उजाला
नहीं मिला धर्म-स्थलों से
मुझे उजाला
नहीं मिला बाजार से
मैंने सीखा है
अपना दीपक
स्वयं बनना
#विनोद सिल्ला
 
जीवन परिचय
 
विनोद सिल्ला 
माता का नाम/ पिता  का नाम
    श्रीमती संतरो देवी/श्री उमेद सिंह सिल्ला 
 पत्नी का नाम :- श्रीमती मीना रानी
 
  जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
 
शिक्षा/जन्म तिथी
    एम. ए. -इतिहास, बी. एड.
व्यवसाय अध्यापन
प्रकाशन विवरण .
जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
 मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
यह कैसा सूर्योदय’ (काव्यसंग्रह)
संपादित पुस्तकें 
प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
 मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
 
सम्मान का विवरण 
डॉ. भीमराव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड-2011
भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 
 महात्मा ज्योति बा फूले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड-2012
भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 
ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा 15, जून 2014 को 
उपमंडल प्रशासन, टोहाना द्वारा गणतन्त्र दिवस, 26, जनवरी 2012 को
 दैनिक सांध्य समाचार पत्र, ‘टोहाना मेल द्वारा 17, जून 2012 के
 अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा 06, जुलाई 2014 को
लाला कली राम साहित्य सम्मान-2015
साहित्य सभा, कैथल
के सी टी ग्रूप ऑफ इन्सटीट्युशन फतेहगढ़, लहरागागा (पंजाब) 07, फरवरी 2017
 संस्थाओं से सम्बद्धता (यदि कोई हो तो विवरण दें)
हरियाणा प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन,टोहाना
अध्यक्ष (2013-15)
मुख्य सलाहकार (2015-17)
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

इन तीनों को अब दिल्ली लाइए

Sun Dec 23 , 2018
मैं पहले ही लिख चुका हूं कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के भाजपा मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्य में काफी अच्छे काम किए थे लेकिन उनकी हार का बड़ा कारण नोटबंदी, जीएसटी, अनुसूचित संशोधन कानून, फर्जिकल स्ट्राइक, सीबीआई और रफाल-सौदे आदि की बदनामियां रही हैं। सच्चाई तो यह है कि उन्हें […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।