राम मूरत ‘राही’ के लघुकथा संग्रह का हुआ विमोचन

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इंदौर। क्षितिज साहित्य संस्था द्वारा श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति के सभागार में रविवार को आयोजित अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन – 2022 में शहर के वरिष्ठ लघुकथाकार राम मूरत ‘राही’ के तृतीय लघुकथा संग्रह ‘इंजेक्शन’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजशेखर व्यास वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व अपर महानिदेशक, सारस्वत अतिथि डॉ. विकास दवे (निदेशक साहित्य अकादमी, भोपाल), मंचासीन : सूर्यकांत नागर, डॉ. बलराम अग्रवाल, सतीश राठी थे। इस अवसर पर भगीरथ, डॉ. पुरुषोत्तम दुबे, संतोष सुपेकर, पवन शर्मा, ज्योति जैन, शील कौशिक, घनश्याम मैथिल, गोकुल सोनी, दीपक गिरकर, सुरेश रायकवार, दिलीप जैन, हरेराम वाजपेई, मुकेश तिवारी, देवेंद्र सिंह सिसोदिया एवं यशोदा भटनागर सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।

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राधेश्याम माहेश्वरी भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित

Sat Oct 15 , 2022
इन्दौर । हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्यरत संस्थान ’मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा शहर में 24 घण्टे खुले रखने वाले पुस्तकालय के संचालक एवं साहित्यकार राधेश्याम माहेश्वरी जी को शनिवार के दिन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ एवं वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी द्वारा भाषा […]

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।