गोरैया

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मैं छोटी-सी चिड़िया हूँ,

चुन-चुन दाना खाती हूँ

नदी का पानी पीती हूँ,

घने  पेड़  पर रहती हूँ।

 

ऊंची उड़ान भरती हूँ,

करती मीठी चूं-चूं हूँ

अब न नदी,न पेड़ है

खतरे में मेरा नीड़ है।

 

अब न पानी,न छाया है,

पेड़ों को काट के उजाड़ा है

चारों और है ऊंची अटरिया,

सब कहते हैं मुझको ‘गौरेया।’

——

परिचय..वेदिका सक्सेना ‘अर्शी’ की आयु केवल १० बरस ही है,पर बहुमुखी प्रतिभा की धनी है। अहमदाबाद(गुजरात) में कक्षा ४ में निजी शाला में पढ़ती है,साथ ही लिखती भी है। आत्मरक्षा के लिए वैदिका कराटे प्रशिक्षित है तो मंच संचालन भी इसका शौक है। समय प्रबंधन,आत्मरक्षा की समझ रखने वाली अर्शी छोटी-छोटी कविताएं लिखना बहुत पसंद करती है।

matruadmin

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मुनाफा है..

Sat May 27 , 2017
खर्चों में इजाफा है, तनख्वाह में इजाफा है। हर रोज कम होती जिन्दगी में सुकून खफा सा है, अब कोई भी रिश्ते में जज्बात नहीं बाकी। हर रिश्ता यही पूछे मेरा, क्या मुनाफा है। …….—-  #अमित शुक्ला, बरेली Post Views: 7

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।