प्रधानसेवक के 3 साल

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बधाई हो!२०१४ में दिल से चुनी गई मोदी सरकार के ३ साल पूरे हो गए। पहली बार ऐसा हुआ कि, प्रधानमंत्री बनाने के लिए सरकार चुनी गई। सरकार के सरदार बने बचपन में चाय बेचने वाले नरेन्द्र मोदी,पर हुआ क्या देश का मुखिया बनते ही इन्होंने अपनी भारतीय जनता पार्टी को मां और संसद को मंदिर कहते हुए सदन के दर पर माथा टेका। इतना ही नहीं,लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश का प्रधानमंत्री नहीं,अपितु प्रधान सेवक के रूप में सापेक्षिक पदनावत् किया। शायद ही देश में ऐसा कभी हुआ होगा,जब प्रधानमंत्री ने जनता के साथ इतना करीबी रिश्ता बनाया हो। इसी रिश्ते के बलबूते ही प्रधानमंत्री अपनी `मन की बात` जन के साथ बड़ी सरलता और असरदार तरीके से कह पाते हैं। अपनी कही और जनता से सुनी बातों को अमलीजामा पहनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। यही अदा मन को छू जाती है,और फिदा होकर नवजवानों का कारवां प्रधानमंत्री की छाया अपनी काया पर पोषाकों के रूप में ओढ़े नजर आता है। जैसे किसी फिल्मी नायक का नया फैशन सिर चढ़कर बोलता है,वैसे  ही प्रधानमंत्री की आभा जनाभिमुख और अनुकरणीय बनी हुई है। यह है न कमाल की बात! देश का युवा प्रधानसेवक की छवि में अपना भविष्य तलाश कर साथ-साथ आगे बढ़ रहा है।
अविरल,मोदी सरकार ने 3 साल में आमूलचूल कदम उठाए। कदमताल प्रधानसेवक का स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत अभियान जन-गण में आंदोलन का स्वरूप बनकर कई गांवों और शहरों को गदंगी से मुक्त करा चुका है। स्किल इंडिया,मेड-इन-इंडिया,डिजिटल इंडिया,स्टार्ट-अप व स्टैण्ड-अप इंडिया और मुद्रा योजना युवाओं को स्वरोजगार के नित-नए अवसर दे रही है। सरकार की बहुआयामी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,ग्राम सिंचाई,मृदा संरक्षण,आवास,गरीब कल्याण,बीमा व पेंशन,जन औषधि,सुरक्षित मातृत्व, उज्जवला तथा श्रममेव जयते योजना गरीबों,किसानों और मजदूरों के वास्ते उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। निर्णायक फैसलों में `सर्जिकल स्ट्राइक` ने दुश्मन देश पाकिस्तान को दहला दिया। विश्व स्तर पर चीन और पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार घेराबंदी कर जवाबी कार्रवाई की। इसके अलावा वैश्विक समूहों में प्रधानमंत्री की कुशल कूटनीति मील का पत्थर साबित हुई। आगे बढ़ते हुए सरकार के आर्थिक मुद्दों पर जनधन योजना,कैशबेन,कैशलेस इंडिया,डायरेक्ट बेनिफिट्स स्कीम और ऑनलाइन भुगतान व टेंडरिंग जैसे ऐतिहासिक निर्णय धरातलीय बने। इसी गाथा में सांसद आदर्श ग्राम योजना,बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ,दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति,स्मार्ट सिटी मिशन,एक भारत-श्रेष्ठ भारत,ग्राम उदय से भारत उदय,स्वदेश दर्शन,७ वां वेतनमान और वन रैंक वन पेंशन,विश्व योग दिवस की सौगात इत्यादि अच्छे दिनों के प्रकल्प हैं।
अभिभूत,प्रधानसेवक के बेमिसाल 3 साल में लोगों का बरसों बाद नजरिया बदला कि,यह अच्छी सरकार है। इसकी जिम्मेदारी जिसे हमनें सौंपी थी,वह परिश्रम,ईमानदारी और दमदारी से पूर्ण निष्ठा के साथ निभा रहा है। घोष वाक्य!`न खांऊगा,न खाने दूंगा` चरितार्थ हुआ है। इसी अटूट बंधन से जन-अधिनायक और सरकार का नाता प्रगाढ़ बनाl लिहाजा,यकीन हो चला है कि,बचे 2 साल भी छोटे-छोटे लोगों के बड़े-बड़े काम के अतिरिक्त सबके साथ,सबके विकास के लिए होंगे। बेशक विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि, मिशन अभी अधूरा है,अच्छे कामों का आगाज हुआ है,अंजाम आना बाकी है। दौरान निःसंदेह देश प्रगति, उन्नति,आर्थिक,सामरिक और वैश्विक  दृष्टि से आगे बढ़ा है। सारी दुनिया ने भारत का लोहा मानकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को सलाम किया है। यथेष्ट झंडा ऊचा रहे हमारा मंत्रमुग्ध के भाव से प्रधानसेवक की कथनी और करनी में कोई भेद नजर नहीं आया है,इसीलिए मोदी सरकार और एक बार… का शंखनाद जन-गण में जरूर गूंजेंगा।
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हेमेन्द्र क्षीरसागर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।