मोहब्बत में

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लूटाकर सब कुछ अपना
तुम्हें खुश नहीं कर पाये।
जमाने की खाकर ठोकर
संभल तुम नहीं पाये।
अपने और परायो को
नहीं पहचान तुम पाये।
क्योंकि तुम खुद किसी के
दिलमें जगह नहीं बना पाये। ।

कसम खा खा कर तुमने
न जाने कितनो को लूटा।
न जाने कितनो को तुमने
अपनी अदाओं से लूटा।
तभी तो लोगों ने तुमसे
अपना मुँह मोड़ लिया।
और जमाने में तुम्हें
अकेला छोड़ दिया।।

मोहब्बत के नाम पर तुमने
न जाने कितने दिल तोड़े।
न जाने कितनो को तुमने
मोहब्बत करना भूला दिया।
न जाने कितनो का तुमने
घर संसार को मिटा दिया।
जो अब न जीने में है
और न ही मरने में है।।

अपने हुस्न के बल पर
कुछ दिन ही जी पाओगें।
फिर डालती उम्र में तुम
किस के पास जाओगें।
कही तुमको भी कोई
तुम्हारे जैसा मिल जाये।
और तुमको भी तुम्हारी
करनी का फल मिल जाये।।

करो ना तुम बदनाम
मोहब्बत जैसे शब्द को।
मोहब्बत करने वाले
लगा देते इसमें पूरा जीवन।
तभी अपनी मोहब्बत को
परवान चढ़ा पाते है।
और अपनी मोहब्बत को
अमर दुनियां में कर जाते है।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन (मुंबई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।