मेरे मन के भाव

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कुछ स्वप्न थे मेरे धुंधलेे से
कुछ चाहत मेरी उजली थी
कोई आहट थी धीमी सी
उनके लिए मै पगली सी थी।

कुछ मन में भाव अजीब से थे
दिल में मिलने कुछ चाहत थी
न मै मिल सकी न तुम मिल सके
दोनों के दिल में घबराहट थी

कुछ पगडंडी टेढ़ी सी थी
दिल में कुछ झुंझलाहट थी
मन मसोस के रह जाते थे
बस मिलने की एक आहट थी

न कह सकी मै मन की बाते
न कह सके तुम मन की बाते
बीत रही थी कुछ इस तरह ही
जीवन की ये दिन और राते।।

तुम भी कुछ मजबूर थे
मै भी कुछ मजबूर थी
मिल न सके हम दोनों
दोनों की कुछ मज़बूरी थी।।

एक तरफ कुछ खाई थी
दूसरी तरफ भी खत्ती थी
दोनों ही मौत की कुएं थे
दोनों में बहुत गहराई थी।।

फूलों में कुछ अजीब खुशबू थी
कांटो में कुछ अजीब चुभन थी
चले जा रहे थे दोनों राहों में
दिलो में दोनों के अटकन थी।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।