हिंदी महोत्सव 2020 विशेष 2 सितंबर 2020 प्रतियोगिता आलेख लेखन*।।

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विषय भारत में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावना।।

हम हिंदी है,हिंदी हमारी शान, भारत मां और हिंदी मां दोनों है, एक समान।हम सब गाएं एक ही गान” हिंदी में बसा है सारा हिंदुस्तान।।

हिंदी भाषा का इतिहास लगभग 1000 वर्ष पुराना है ।हिंदी भाषा विश्व की लगभग 3000 भाषाओं में अपना प्रमुख स्थान रखती है। विचारों की अभिव्यक्ति व सौम्यता का एहसास एक ऐसी भाषा महसूस करा सकती है। जो जनमानस आसानी से समझ सके व उसकी छवि मन में न उतरकर दिल में बसती हो। ऐसी विलक्षण, कोमल भाषा हिंदुस्तान में लगभग 90% लोगों द्वारा समझी लिखी और बोली जाती है।
हिंदुस्तान में अंग्रेजी भाषा परतंत्रता के समय सन् 1935 ईस्वी में एक अंग्रेज अधिकारी मैकाले द्वारा जबरन हिंदुस्तानियों के ऊपर थोपी गई थी। उनकी सोच के अनुसार भारत में ऐसे वर्ग की परिकल्पना थी ।जो शारीरिक बनावट के आधार पर हिंदुस्तानी और मानसिक सोच विचार से अंग्रेज हो।ऐसी विदेशी भाषा को हम हिंदुस्तानियों के ऊपर लादा गया।जिसे केवल हिंदुस्तान में 10% लोग ही जान पाते हैं।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के कालखंड खासकर आधुनिक इतिहास सन्1857 ई.पू. से 1947 ई.पू. तक जितने भी भारतीयों द्वारा भारत भूमि को आजाद करवाने के लिए आंदोलन किए गए थे।ज्यादातर जनता उस वक्त हिंदी नारों जैसे सुभाष चंद्र बोस जी का नारा था “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का प्रसिद्ध नारा था।जो सन 1942 ई. पू. में दिया गया था “अंग्रेजों भारत छोड़ो” इन स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं ने इन नारों से आमजन के मन को ही नहीं बदला, बल्कि उनके दिल में एक क्रांति की लहर पैदा कर दी। वह सब संभव हो सका “हिंदी प्रेम” के कारण।

21वी. सदी के भारत में जहां वैश्विक बाजार अपनी जड़े जमा रहा है। नित नए अविष्कार अभियांत्रिकी, पर्यटक उद्योग, व्यवसायीकरण, विदेशी फैक्ट्रियों के आगमन व स्थापन होने से उपरोक्त स्थानों में बड़े ओहदे में बैठे इन कंपनियों के बॉस, सी.ई.ओ, टेक्निकल अधिकारी, इत्यादि 1% लोग ही अंग्रेजी भाषा बोलते हैं ।जबकि इन सभी क्षेत्रों में मजदूरी करने वाले कामगार व कर्मचारी मध्यम वर्ग सभी हिंदी जानते हैं, व समझते हैं। उनकी आम बोलचाल की भाषा एक दूसरे के दुखों को आपस में साझा करना ,आत्मीयता की धोतक हिंदी भाषा से ही संभव हो पाता है ।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं में से एक हिंदी अपना अलग व विलक्षण स्थान रखती है, और विश्व में अपनी वैज्ञानिक लिपि देवनागरी के कारण महत्वपूर्ण भी है। हिंदी भाषा की लोकप्रियता आज डिजिटल न्यूज़ चैनलों, सोशल मीडिया साइट्स, ट्विटर, इंस्टाग्राम,फेसबुक, व्हाट्सएप, इत्यादि में सर्वाधिक बढ रही है। कुछ जनमानस इसके घोर निंदक भी है। लेकिन उसके बावजूद भी यह दिन प्रतिदिन उन्नति के शिखर पर उदय मान व प्रवाहित होती जा रही है।

आज वैज्ञानिक क्षेत्र में, अभियांत्रिकी के क्षेत्र, में डॉक्टरी की पढ़ाई में हिंदी के शब्दों की दरकार है ।इसी कारण से बहुत से विद्यार्थियों का सपना विदेशी भाषा के संदर्भ में ऐसे पाठ्यक्रमों से उन्हें वंचना का शिकार होना पड़ता है। अगर हिंदी माध्यम में इन पाठ्यक्रमों को हिंदी भाषा के रूप में स्वीकार किए जाने से करोड़ों छात्रों का यह सपना पूरा हो सकेगा। हिंदी भाषा का भविष्य बहुत ही उज्जवल है। हमें ताज्जुब होगा कि 18 करोड लोग हिंदी को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं, और 30 करोड लोग ऐसे हैं जो हिंदी को द्वितीय भाषा के रूप में स्वीकार करते हैं। विश्व के 150 देशों में हिंदी भाषी लोग निवास कर रहे हैं ।जो अपने आप में अद्वितीय और अकल्पनीय है।
ज्ञान संसार में और पत्रिका संसार में हर रोज विश्व में 25 से अधिक न्यूज़पेपर ,मैगज़ीन निकलते हैं। जारी दौर में यू.ए.सए के 45 विश्वविद्यालयों के साथ 176 विद्यालयों में हिंदी का अध्ययन करवाया जाता है ।हिंदी वैज्ञानिक क्षेत्र में उपेक्षा का शिकार हुई है। यह बात सत्य है, और यह भी जोड़कर देखा जाता है कि अंग्रेजी भाषा प्रथम श्रेणी और आधुनिक भाषा है।जबकि हिंदी को द्वितीय श्रेणी तृतीय वर्ग भाषा के रूप में जाना जाता है। ज्ञान, विज्ञान के पाठ्यक्रम में केवल अंग्रेजी भाषा के शब्दों का इस्तेमाल होता है। भाषा का माध्यम किसी ज्ञानी व्यक्ति की गारंटी नहीं देता।हिंदी भाषा में भी शब्दों का ज्ञान का संग्रह है। जो आपको अन्य भाषाओं से अलग बनाता है।

हमें रूस, जापान,चीन इत्यादि देशों से सीखने की नितांत आवश्यकता है।क्योंकि इन देशों ने जितनी भी वैज्ञानिक उन्नति की है। उन सभी का श्रेय उनके अपने देश की भाषा को जाता है। बल्कि विदेशी भाषा को अपनाने में नहीं। हमें हिंदी के प्रचार प्रसार में दिन रात एक करना होगा तभी निश्चित रूप से हम हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने में सकारात्मक रूप से सफल होंगे। हिंदी भाषा की बढ़ती लोकप्रियता,उसकी पसंद से जहां भविष्य स्वर्णिम होगा ।इसमें अनेक भारतीयों को अपने रोजगारपरक साधनों के रूप में भी स्थापित करने का मौका व अवसर प्राप्त होगा।हमें हिंदी को अधिक से अधिक रोजमर्रा की जिंदगी में बोलने, दैनिक कामकाज, प्रार्थना पत्र, अखबार, पत्र पत्रिकाओं, को पढ़ना सोशल मीडिया में अधिक से अधिक हिंदी का इस्तेमाल उसकी लिखने की अनिवार्यता को लागू करना होगा। मुझे व्यक्तिगत रूप से खुशी होती है। कि हिंदुस्तान में ऐसी कोई भी अन्य भाषा नहीं है।जो हम सब भारतीयों को हिंदी जैसी आत्मीयता का बोध और जुड़ाव एक सूत्रीय संपर्क भाषा के रूप में दे सके।

**हिंदी संस्कृति,हिंदी संस्कार

हिंदी से होता, हिंद का सत्कार** जय हिंदी

   ठाकुर तारा हिमाचल प्रदेश
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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।