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punam katariyar
टेसू-रंग गहरी है बनी,
रंग-गुलाल चहुं दिशि उड़े.
कोरी चूनर  रंग दूं धानी,
नैनों में प्रीत के लाल-डोरे.
सरसों-फूल से ले पीत- रंग,
रंग दूं गोरी तेरे कपोल गोरे.
इन्द्रधनुष की पिचकारी से,
सप्तरंगी करूंअंग-अंग तेरे,
जगजननी के आंचल को,
नवजीवन के ‌अंकुरण भरें.
फाग-रंग में डूबे  श्याम,
राधा  का  मनुहार करें.
चिबुक उठा, राधा-मुख देख,
हो  गये   विस्मित  कान्हा.
अश्रुकण ढलकें नैनों से,
विह्वल,भंग- स्वर में बोली,
सीमा पर घमासान मचा है,
सिन्दूर की होलिका जल रही.
खून बह रहे निशि-प्रात वहां,
कहो कान्हा , कैसे खेलूं होली?
  #पूनम (कतरियार),पटना

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http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/07/punam-katariyar.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/07/punam-katariyar-150x150.pngmatruadminUncategorizedकाव्यभाषाkatariyar,punamटेसू-रंग गहरी है बनी, रंग-गुलाल चहुं दिशि उड़े. कोरी चूनर  रंग दूं धानी, नैनों में प्रीत के लाल-डोरे. सरसों-फूल से ले पीत- रंग, रंग दूं गोरी तेरे कपोल गोरे. इन्द्रधनुष की पिचकारी से, सप्तरंगी करूंअंग-अंग तेरे, जगजननी के आंचल को, नवजीवन के ‌अंकुरण भरें. फाग-रंग में डूबे  श्याम, राधा  का  मनुहार करें. चिबुक उठा, राधा-मुख देख, हो  गये   विस्मित  कान्हा. अश्रुकण ढलकें नैनों से, विह्वल,भंग-...Vaicharik mahakumbh
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