
टेसू-रंग गहरी है बनी,
रंग-गुलाल चहुं दिशि उड़े.
कोरी चूनर रंग दूं धानी,
नैनों में प्रीत के लाल-डोरे.
सरसों-फूल से ले पीत- रंग,
रंग दूं गोरी तेरे कपोल गोरे.
इन्द्रधनुष की पिचकारी से,
सप्तरंगी करूंअंग-अंग तेरे,
जगजननी के आंचल को,
नवजीवन के अंकुरण भरें.
फाग-रंग में डूबे श्याम,
राधा का मनुहार करें.
चिबुक उठा, राधा-मुख देख,
हो गये विस्मित कान्हा.
अश्रुकण ढलकें नैनों से,
विह्वल,भंग- स्वर में बोली,
सीमा पर घमासान मचा है,
सिन्दूर की होलिका जल रही.
खून बह रहे निशि-प्रात वहां,
कहो कान्हा , कैसे खेलूं होली?
#पूनम (कतरियार),पटना
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