मिटाना पड़ता हैं

Read Time0Seconds

बोर्ड पर लिखी इबारत को ,
नई इबारत लिखने के लिए मिटाना पड़ता है।
हाथों में लगी मेहंदी को ,
रंग देखने के लिए मिटाना पड़ता है।
सूखे हुए पौधे को ,
नया पौधरोपण के लिए हटाना पड़ता है।
समाज में व्याप्त विकृतियों को ,
नई ऊर्जा का आगाज करके मिटाना पड़ता है।
नए विचारों को आगे बढ़ाने के लिए,
मन भेद मतभेदों को मिटाना पड़ता है ।
रात के गहन अंधेरे को,
भोर की नई किरणों से मिटाना पड़ता है।
विनाशकारी हो अगर अहंकार ,
तो नव निर्माणके लिए उसे मिटाना पड़ता है।
गलतफहमियां से उपजे गर्त में जा रहे रिश्तो को,
पवित्र विचारों के संवादों से मिटाना पड़ता है ।
हो अगर राष्ट्र का विध्वंस,
तो जन आक्रोश के आंदोलनों से मिटाना पड़ता है।

# स्मिता जैन

1 0

matruadmin

Next Post

रक्षा

Sat Aug 1 , 2020
रक्षा के संकल्प का पर्व रक्षा बंधन कहलाता है रक्षक केवल परमात्मा है वही रक्षा फ़र्ज़ निभाता है बहन शुभ सोचती भाई की भाई खुशी बहन की चाहता है शुभ कार्य हो ,मिले खुशी कोई भी बहन न रहे दुःखी रक्षा सूत्र बंधवा बहन से बुराई त्यागने की सौगात दो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।