आया है तीजो का त्यौहार

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आओ सखि सब झूला झले,
पींग बढ़ाकर नभ को छूले।
आया है तीजो का त्योहार,
मन में है मेरे खुशी अपार।।

साजन भी मेरे आ जाएंगे,
सुहाग का सामान वे लाएंगे।
करूंगी मै सोलह सिंगार,
महकेगा मेरा सारा संसार।
भूल जाएंगे अब मन के सूले,
आओ सखी सब झूला झूले।।

रिमझम रिमझिम पानी बरसे,
जिया मेरा पिया को तरसे।
हो जाएगा जब मिलन मेरा,
प्रसन्न चित्त होगा तब मेरा।।
आओ सब पिछली बाते भूले
आओ सखी सब झूला झूले।।

पड़ गए झूले आम की डार पर,
कोयले कूके अपनी तान पर।
भोरे झपटे हर कलि कलि पर
तितलियां बैठी है हर फूल पर
ऐसी तीजो को कभी ना भूले।
आओ सखी सब झूला झूले।।

आया है सुसराल से सिंदारा,
भरा इसमें सुहाग का भडारा।
इसमें भरा मां बाप का प्यार,
और भाई भाभी का दुलार।
ऐसे पीहर को मै कैसे भुलू,
आओ सखी सब झूला झूले।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।