
पर्यावरण को लेकर तमाम देशों की अब तक की जो धारणाएं हैं, जो नीतियां हैं, उनमें व्यापक बदलाव किये जाने और एक साझा नीति बनाकर पूरी दुनिया को एक साथ आगे बढ़ने का समय आ गया है।
कोरोना संक्रमण ने पूरी दुनिया को प्रकृति और पर्यावरण पर अपनी सोच को बदलने का संकेत दे दिया है। यह चेतावनी भी दे दिया है कि अब दुनिया को सुरक्षित रहने के लिए कुछ असाधारण कदम उठाने होंगे।
कोरोना ने दुनिया को एक साथ दो चित्र दिखाए। एक चित्र में मानव जीवन बुरी तरह अस्तव्यस्त दिखाई देता है वहीं दूसरे चित्र में प्रकृति अपने नैसर्गिक रूप में सजी संवरी दिखाई देती है। दोनों के अपने अपने निहितार्थ हैं।
इस लॉकडाउन में मानवीय गतिविधियों के रुकने से प्रकृति को सीधा लाभ पहुंचा है। प्रदूषण का स्तर आश्चर्यजनक रूप से कम हुआ है। हवा, नदी, जंगल और भूमि के साथ पूरा पर्यावरण स्वच्छ और निर्मल हो गया है। प्रकृति की इन मनमोहक भंगिमाओं ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पक्षियों का कलरव दुबारा गूंजने लगा है। कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी जिनका अस्तित्व समाप्त हो गया था इस कोरोना काल ने उन्हें नया जीवन दे दिया।
औद्योगिक गतिविधियों के बंद होने की वजह से ओजोन लेयर में जो सुधार हुआ उसके कारण आकाश भी नीला दिखने लगा है। पृथ्वी के कंपन में भी कमी आई है। कार्बन उत्सर्जन रुक गया है। दुनिया भर में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से पहली बार कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में ऐसी कमी दर्ज की गई है।
भारत नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल से 280 किमी दूर स्थित हिमालय पर्वत श्रृंखला साफ दिखाई दे रही है। मुंबई के समुद्री तट पर लाखों की संख्या में कछुओं के साथ साथ कई अन्य जलचर आनंद से विचरण कर रहे हैं। यह दृश्य हर किसी को आनंद से भर देता है। बिना किसी टेलिस्कोप के सप्तऋषि तारामण्डल और अन्य आकाशीय पिंड आसमान में साफ साफ दिखाई दे रहे हैं।
पूरी दुनिया जिस पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा बड़ी बड़ी योजनाएं बनाकर और करोड़ों अरबों रुपये खर्च करके भी न कर पाई उसे इस विश्वव्यापी लॉकडाउन ने कर दिखाया। इस संकट ने सीख भी दी और चेतने का एक मौका भी दिया। अब भी नहीं चेते तो आगे प्रकृति का कौन सा रूप सामने आएगा इसकी कल्पना भी भयानक है।
अब पूरी दुनिया को इस विषय पर चिंता करने की जरूरत है कि लॉकडाउन के कारण जिस दर से कार्बन उत्सर्जन घटा है लॉकडाउन खुलने के बाद जब दुनिया फिर से पहले की तरह चलने लगेगी तो क्या उसी दर से कार्बन उत्सर्जन फिर से नहीं बढ़ेगा…? पर्यावरण में जो परिवर्तन आज दिखाई दे रहा है क्या उसे कायम रखने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है…?
कोरोना काल में लोगों की जान बचाना हर देश के लिए प्राथमिकता बनी हुई है। इस महामारी से लड़ाई में सभी देश साथ खड़े हैं। तो क्या ये सभी देश ऐसा ही जज्बा और ऐसी ही एकजुटता पर्यावरण को बचाने के लिए भी दिखाएंगे… इस विश्व पर्यावरण दिवस पर सबसे बड़ा सवाल यही है…
डा. स्वयंभू शलभ