क्या कोरोना वायरस ने लाॅकडाउन में लेखन को दिया नया आयाम?

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    इसमें कोई संदेह नहीं है कि कोरोना वायरस ने लाॅकडाउन में लेखन को नया आयाम दिया है। क्योंकि पूरा दिन और रात खाली बैठने से लोग तरह-तरह के व्यंजन, हस्तकला, झाड़ू-पोछा इत्यादि लगाने से पीछे नहीं हटे। फिल्में भी इतनी देखना संभव नहीं था। फिर करें तो क्या करें? प्रश्र गंभीर है।
  अब जब उपरोक्त कर्म करने से पुरुष पीछे नहीं हटे तो लेखनकला की तो बात ही कुछ और है। आमों के आम और गुठलियों के दाम वाली कहावत पूर्णतः चरितार्थ हो रही है। चूंकि एक तो लेखन से समय कट जाएगा दूसरा लेखक होने पर गौरवान्वित महसूस होगा।चार लोग जानने भी लगेंगे। इसके अलावा लेखनकला से अपने मन की बात दूसरों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। जिससे प्रशासन की नींद उड़ाई जा सकती है और राष्ट्रभक्ति अलग हो जाती है। इससे भी अधिक बल उस समय मिलता है, जब मातृभाषा में लिखने पर मातृभाषा सेवक और राष्ट्रीय भाषा लिखने पर राष्ट्र स्तर पर ख्याति प्राप्त होती है। जिसकी लालसा प्रत्येक मानव में होती है। यूं भी मन की बात करने के लिए हम प्रधानमंत्री तो बनने से रहे।
  उल्लेखनीय यह भी है कि हमें माता सरस्वती की सेवा का अवसर भी मिलेगा और कृपा भी प्राप्त होगी।
 अतः कोरोना वायरस ने लाॅकडाउन में लेखन को अत्याधिक नया आयाम दिया है।

इंदु भूषण बाली

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।