इश्क सूफियाना..

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sourabh
कभी हमारी मोहब्बत की कहानी
पढ़े ये जमाना,
जिसमें पाक मोहब्बत का हो खजाना।

आओ दें इस दुनिया को प्रेम का, अनोखा नजराना,
कुछ ऐसा हो तेरा-मेरा इश्क सूफियाना।

जिसे पाकर दुनिया की रुह पावन
हो जाए,
हमारे प्रेम की पावन कहानी लिखे ये जमाना।

ये दुनिया राधा-कृष्ण के प्रेम की,
जो सुनती है धुन,
जैसे मीरा ने श्री कृष्ण के प्रेम को लिया था चुन।

उस प्रेम के पवित्र एहसास को महसूस करना है तो,
मेरे दिल की गली में आकर वो धुन कभी तू भी सुन।

हो जाएँ लोग दीवाने,पढ़कर उस प्रेम की कहानी
जिसे पढ़कर आ जाए जवानी में एक नई रवानी।

हम एक दूसरे को महसूस करने लगें, कुछ इस तरह,
मैं हो जाऊं तेरे प्रेम में पागल, और तू हो जाए दीवानी।।

                                                                      #सौरभ जैन(उज्जवल)

परिचय : रचनाकार बनाने की दिशा में सौरभ जैन का प्रयास जारी है। रामपुर मनिहारिन( जिला-सहारनपुर) के निवासी हैं और बी.कॉम.कर लिया है। २२ वर्ष के सौरभ शायरी व छंदमुक्त काव्य रचना को अधिक पसंद करते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।