चीरहरण

Read Time2Seconds

चीत्कारों से जब गूंज उठी थी,
सभा कौरवों के राज की।
क्या सन्नाटा छाया होगा
ओर क्या कहानी होगी,
उस शाम की।
सबने सब कुछ सोचा होगा,
कि पांडवों ने क्यों था ऐसे किया।
पर क्या सोचा होगा द्रौपदी ने,
जब चीर था दुशासन ने छुआ।
हाय क्यों मैंने माना अपने ,
अभिमान को अपना ही गहना।
जब आज उस अभिमान के कारण,
इस विष को पड़ा मुझे सहना।
न जानें तब क्यों चुप हो गई थी,
जब बँटी थी मैं सामान सी।
क्यों मुस्काई थी मैं तब,
जब हो गई थी नाकाम सी।
मैंने क्यों सोचा कि एक,
जीवन में पूरा नभ घोलूँ मैं।
तब मर्यादा न रख पाई तो ,
अब कैसे कुछ बोले मैं।
पाना चाहा सारा क्षितिज,
पर पा न सकी इक साझं भी।
बनकर रह गई मात्र छलावा,
ओर खो बैठी अपना नाम ही।
जानती थी कि हाथ है कौरव के,
पर मन पांडव के थे सभा में।
पर कैसे कहती तू अब तो
हो जा मेरा,
अब बात थी मेरे आन की ।
हर पल हर पग ध्यान दिया की,
अब न मैं कोई नारी हूँ।
हाँ, हूँ मैं एक प्रतिज्ञा,
निर्जीव हूँ मैं,
मैं तो खुद से ही हारी हूँ।
नाश हुआ एक कुल का था तब,
विनाश हुआ तब पर मेरा भी।
न मैं भीतर से मरती,
और न तू मुझसे जीता ही।
अब न मैं जन्म लूँगी,
ए तारणहार मेरी सुन लेना,
अब हर बार मुझे जीवन देकर,
न बार-बार मेरी बलि लेना।
पर हाय मैं बेचारी लेती हूँ,
आज भी अग्नि के फेरे,
फिर लाचार हो जाती हूँ,
क्यों तारणहार तुम भी नहीं मेरे।
तब मैं सन्नाटों में चीखी,
अब चीखूँ मैं खुलेआम ही ,
काश वो समय आ जाए ,
जब चीर हरे मात्र नाम ही।
अब तो बहुत मुखौटे है,
किस-किस का नाश करूँगी मैं,
हे सृजन, हे देव मेरे,
अब तो धरा बनूँगी मैं।
सहना है हर पल मुझको ,
हाथों और नज़रों से चीरहरण ,
पर फिर भी चुप होना है मुझको,
क्योंकि यही है आज की द्रौपदी का जीवन।

अदिति सिंह भदौरिया

इन्दौर

परिचय—–

नाम—अदिति सिंह भदौरिया
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री,
जन्म– 10.दिसम्बर
शिक्षा- एम. बी. ए(एच.र)

सदस्य–शुभ संकल्प ग्रुप, विचार प्रवाह साहित्यिक मंच ।
क्षितिज साहित्य मंच।

शुभसंकल्प मंच के साझा संग्रह में कविता प्रकाशित।
विचार प्रवाह साहित्यिक मंच द्वारा सांझा लघुकथा संग्रह में लघुकथा प्रकाशित।
राष्ट्रीय पुस्तक मेले काव्य पाठ
इंदौर लिटरेचर फेस्टीवल में परिचर्चा के लिये आमंत्रित

क्षितिज इंदौर मंच द्बवारा
अखिल भारतीय लघु कथा सम्मेलन में(सहभागिता सम्मान)
विश्व इंदौर लेखिका मंच द्बारा (नारी गौरव सम्मान)

0 0

matruadmin

Next Post

विश्वास

Tue Mar 17 , 2020
मुसीबत का पहाड़, कितना भी बड़ा हो। पर मन का विश्वास, उसे भेद देता है। मुसीबतों के पहाड़ों को, ढह देता है। और अपने कर्म पर, जो भरोसा रखता है।। सांसारिक उलझनों में, उलझा रहने वाला इंसान। यदि कर्म प्रधान है तो, सफलता से जीयेगा। और हर कठनाईयों से बाहर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।