मन्दिर- मस्जिद बने अवध में…

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हिन्दू ,मुस्लिम, सिख ,ईसाई ,
सबका हिंदुस्तान रहे
मन्दिर- मस्जिद बने अवध मे ,
जाति धर्म सम्मान रहे ll

भारत माता खुशी हो गई ,
खुशी राष्ट्र का गान हुआ ll
न्यायधीश के आज न्याय से ,
न्यायालय का सम्मान हुआ ll

मानव की मानवता कायम ,
मानव धर्म महान हुआ ll
नफरत नरवस हुई देश की ,
खुशियों का सम्मान हुआ ll

मन्दिर मन्दिर पूजा होगी ,
मस्जिद मस्जिद होय अजान ,
गिरजाघर गुरुद्वारे में चल ,
हर विपता का होय निदान ll

हम ताकतवर दुनिया के ,
बल भाईचारा बना रहेगा ll
विजयी विश्व गुरु भारत ,
जग में जयकारा बना रहेगा ll

चले कदम दो हाथ बढ़ा कर ,
‘राजू’ राग प्रेम का गाये ll
अपने इस अखंड भारत में ,
खुशियों के दीप जलाये ll

सबके दिल मे प्रबल प्रेम हो ,
यही नेक अरमान रहे ll
मन्दिर मस्जिद बने अवध में ,
जाति धर्म सम्मान रहे ll


#राजू चौरसिया

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।