मन्दिर- मस्जिद बने अवध में…

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हिन्दू ,मुस्लिम, सिख ,ईसाई ,
सबका हिंदुस्तान रहे
मन्दिर- मस्जिद बने अवध मे ,
जाति धर्म सम्मान रहे ll

भारत माता खुशी हो गई ,
खुशी राष्ट्र का गान हुआ ll
न्यायधीश के आज न्याय से ,
न्यायालय का सम्मान हुआ ll

मानव की मानवता कायम ,
मानव धर्म महान हुआ ll
नफरत नरवस हुई देश की ,
खुशियों का सम्मान हुआ ll

मन्दिर मन्दिर पूजा होगी ,
मस्जिद मस्जिद होय अजान ,
गिरजाघर गुरुद्वारे में चल ,
हर विपता का होय निदान ll

हम ताकतवर दुनिया के ,
बल भाईचारा बना रहेगा ll
विजयी विश्व गुरु भारत ,
जग में जयकारा बना रहेगा ll

चले कदम दो हाथ बढ़ा कर ,
‘राजू’ राग प्रेम का गाये ll
अपने इस अखंड भारत में ,
खुशियों के दीप जलाये ll

सबके दिल मे प्रबल प्रेम हो ,
यही नेक अरमान रहे ll
मन्दिर मस्जिद बने अवध में ,
जाति धर्म सम्मान रहे ll


#राजू चौरसिया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।