चुप कराती थी

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मेरी बातों पर कुछ ऐसे वो शर्माती थी,,
रख कर उंगली होठों पर वो मुझे चुप कराती थी,,
कैसे भूलू वो मिलन की रातें, कैसे खुद को समझाऊ क्या होती है विरह वेदना, क्या तुमको बतलाऊं,
मेरे हाथों से कैसे वो अपने हाथों को छुड़ाती थी,,
रख कर उंगली अपने होठों पर वो मुझे चुप कराती थी प्रेम है पावन, प्रेम है उपवन, प्रेम कोई बाजार नहीं,,
प्रेम तपस्या, प्रेम है पूजा, प्रेम कोई व्यापार नहीं,,
इन्हीं बातों को अक्सर वो मुझको समझाती थी,,
रख कर उंगली होठों पर वो मुझे चुप कराती थी,,
उसके वादे पूरे पक्के, कसमें बिल्कुल सच्ची थी,,
नादानी इतनी गहरी थी, मानो जैसे कोई बच्ची थी,,
खुद की अदा पर ही वो देखो वो कितना इतराती थी,,
रख कर उंगली होठों पर वो मुझे चुप कराती थी,,

#सचिन राणा हीरो
हरिद्वार (उत्तराखंड)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।