छत्तीसगढ़ के परिमार्जित बाल कवि वसंत

Read Time6Seconds

उषाकोठी अर्थात औषधि से भरा हुआ पहाड़ के गोद में बसा है , ग्राम करमागढ़ यानी कर्म का गढ़ । जहाँ राजपरिवार की देवी माँ मानकेश्वरी जी का सिद्ध मंदिर भी है । करमागढ़ को हम सभी दो कारणों से जानतें हैं । पहला – माँ मानकेश्वरी सिद्ध दरबार । दूसरा – देश के प्रसिद्ध बालगीतकार श्री शंभूलाल शर्मा वसंत जी की बाल साहित्य साधना ।
कर्म के गढ़ में सिर्फ पसीनों का किला नहीं वरन् वहाँ हरित आभा वाली छाँव की चहल – पहल भी है । ऐसे एकांत छाँव में देश के प्रसिद्ध बालकवि श्री शंभूलाल शर्मा ‘वसंत’ जी का परिवेश मुझे एक लम्बे समय से आकर्षित करता रहा है ।
अपने धुन के पक्के बालकवि ‘वसंत’ मूलतः गाँव के परिवेश में जीवन – यापन करने वाले विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न कवि हैं ।

ग्राम गोर्रा , रायगढ़ जिले का ही एक साधारण ग्राम है । जहाँ संस्कृत भाषा के विरासतीय वातावरण देने वाले पंडित श्री शिवकुमार शर्मा व श्रीमती वेदमती शर्मा जी के घर में 11 अप्रैल सन् 1948 को श्री शंभूलाल शर्मा ‘वसंत’ जी का जन्म हुआ।
वे बी.ए. , बी. एड. तक शिक्षा प्राप्त किये । तत् पश्चात् एक शिक्षक के रूप में जानें कितनी शालाओं में नौनिहालों को ज्ञानदान देकर , वर्तमान में विश्राम ले चुके हैं ।

उनका विवाह श्रीमती प्रेमकुमारी शर्मा जी के साथ हुआ। बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि , यदि उनका साथ वसंत जी को निरंतर मिला होता तो आज वे किसी संपन्न ग्राम में निवासरत होते । शायद यह नियति का संकेत ही है कि , “वसंत जी का आधा जीवन सर्वथा बालसाहित्य के लिये ही बना है । ”
कवि वसंत जी , अपने दो पुत्र बड़ा वेदप्रकाश शर्मा व छोटा ओमप्रकाश शर्मा के साथ वन्य परिवेश वाला ग्राम में पिछले साढ़े चार दशक से निरंतर रहकर हिन्दी व छत्तीसगढ़ी में बालगीत लेखन कार्य में बड़े सिद्दत के साथ लगे हुये हैं ।

बड़ा पुत्र वेदप्रकाश का अस्वस्थता के कारण विवाह नहीं हुआ है । छोटा पुत्र ओमप्रकाश शर्मा का विवाह श्रीमती प्रतिभा शर्मा जी के साथ हुआ है । जिनका एक पुत्र भी है आरव शर्मा । बाल कवि ‘वसंत’ आज भी अपने पौत्र को देखकर , उसके हाव – भाव को समझ बाल साहित्य का एक नवीन अध्याय गढ़नें में लगे हुये हैं ।

बच्चों के गीत लिखने में माहिर कवि वसंत जी के गीतों में सप्तरंग का समावेश है । बच्चों के लिये बच्चों की बात , बच्चों की भाषा में कहना बड़ों के लिये एक चुनौती साबित होती है । बच्चों जैसा सरल , निश्छल , तरल होना और भी कठिन है । जिस मापदंड पर वसंत जी खरे उतरते हैं ।
वसंत जी समकालीन बाल कविता में प्रकृति चेतना के महत्वपूर्ण कवि के रूप में जाने जाते हैं । वे हिन्दी बाल साहित्य जगत में एक ऐसे नाम है जो , भारतीय बाल साहित्य के गगन में ध्रुव तारे की भाँती नजर आते हैं ।
बालकवि श्री शंभूलाल शर्मा वसंत जी की प्रकाशित कृतियां में (1) सतरंगी कलियाँ (2) मामा जी की अमराई (3) चंदा मामा के आँगन में (4) बरखा ले आई पुरवईया (5) मेरा रोबोट (6) है ना , मुझे कहानी याद (7) जंगल में बजा नगाड़ा (8) कोयल आई , धूम मचाई (9) इक्यावन नन्हें गीत के अतिरिक्त काव्य व्यक्तित्व पर केंद्रित समीक्षा की पुस्तक “बगर गया वसंत” (संपादक :- जय प्रकाश मानस )
छत्तीसगढ़ी में (1) बादर के मांदर (2) नोनी बर फूल (3) आजा परेवां कुरु – कुरु शामिल हैं ।

बालकवि ‘वसंत’ जी की अब तक देश की महत्वपूर्ण बाल पत्रिका नंदन , बालहंस , बालभारती , बालवाटिका , बालबोध , हँसती दुनियाँ , मधुमुस्कान , देवपुत्र , समझ झरोखा , अभिनव बालमन , बाल साहित्य समीक्षा , बचपन , बालमित्र एवं नवभारत आदि में शताधिक रचनाएं प्रकाशित हुई है और आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़ , अंबिकापुर एवं रायपुर से प्रसारण हुआ है ।

“वसंत” जी को साहित्य सेवा हेतु ग्राम्यभारती शोध संस्थान तमनार द्वारा “भारती सम्मान” , । बहुआयामी सांस्कृतिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा “सृजन श्री सम्मान” , ।
नई पीढ़ी की आवाज सम्मान ।
बालवाटिका मासिक भीलवाड़ा (राज.) द्वारा “बालवाटिका सृजन सम्मान” व श्री सिद्धेश्वर साहित्य मंच द्वारा “श्री सिद्धेश्वर साहित्य सम्मान” से अलंकृत किया गया है ।
देश के महान बाल इतिहासकार डॉ. प्रकाश मनु जी अपने हिन्दी बाल कविता का इतिहास व बाल साहित्य का इतिहास में ‘वसंत’ जी की रचना धर्मिता की भूरी – भूरी प्रशंसा किये हैं जो पूरे छत्तीसगढ़ प्रान्त के लिये गौरवमयी तथ्य है ।
छ. ग. के पूर्व शिक्षामंत्री श्री सत्यनारायण शर्मा जी लिखते हैं कि , बालकवि वसंत एक ऐसे रचनाकार हैं जिनकी बाल कृतियां धुंआधार छप रहे हैं । वे छ.ग. ही नहीं वरन् पूरे देश का नाम रौशन करने वाले कवि हैं । “

वसंत जी के काव्य व्यक्तित्व पर छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण साहित्यकार व शिक्षाविद् डॉ. बलदेव जी , रमेश चन्द्र पंत जी , गिरीश पंकज जी , मोहम्मद फहीम , चम्पा मोलवे , मो. अरशद खान , डॉ. चित्तरंजन कर , राम पटवा , डॉ. राजेन्द्र सोनी व डॉ. देवेश दत्त मिश्र आदि ने अपने – अपने कलम चलाये हैं जो अपने आप में एक बड़ी बात है ।
‘वसंत’ जी छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन देश के एक सधे परिमार्जित बाल कवि हैं ।
ऐसे महान बाल साहित्यकार को उनके पुस्तक विमोचन अवसर पर हार्दिक बधाई व अनंत शुभकामनाएं ।

# डॉ.प्रमोद सोनवानी ‘पुष्प’

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

नयापुरा ( माकनी ) में शिक्षक अभिभावक - बैठक का आयोजन किया गया

Sat Oct 19 , 2019
विद्यालय को स्मार्ट बनाने के लिए पालकों ने दिए सुझाव । नागदा (धार ) शासन के निर्देशानुसार 19 अक्टूबर शनिवार को शासकीय नवीन प्राथमिक विद्यालय नयापुरा (माकनी) में अभिभावक -शिक्षक बैठक का आयोजन सरस्वती माँ की वंदना से किया गया , जिसमें विद्यार्थियों की त्रैमासिक परीक्षा , दक्षता उन्नयन की […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।